​ज्योर्तिमठ। विकास के दावों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पोल खोलते हुए ज्योतिर्मठ विकासखंड के सलुड डूंग्रा, भरोसी, पंगनो और मोल्टा गांव के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले साढ़े चार दशकों (1980) से अपनी बदहाल सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण की बाट जोह रहे ग्रामीणों का धैर्य मंगलवार को जवाब दे गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के साथ जोशीमठ की सड़कों पर उतरकर एक उग्र और अनोखा विरोध प्रदर्शन किया।

​करोड़ों का बजट ठिकाने लगा, पर सड़क नहीं बनी

​ग्रामीणों ने तहसील मुख्यालय पर जमकर नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत हो रहे कार्यों में भारी धांधली और भ्रष्टाचार हो रहा है। स्थानीय निवासी और आंदोलनकारी भारत सिंह कुंवर ने विभागीय आंकड़ों के हवाले से गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि जो सड़क 1980 में स्वीकृत हुई थी, वह आज 2026 में भी बदहाल है। इस मार्ग के लिए समय-समय पर कभी 1.05 करोड़, कभी 8 करोड़, तो अब 16 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया, लेकिन धरातल पर सुधार के नाम पर शून्य काम हुआ है।

​पुरानी दीवारों पर ‘सफेदी’ कर खानापूर्ति

​प्रदर्शनकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विभाग और ठेकेदार मिलकर जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के बजाय पुरानी और जर्जर हो चुकी दीवारों पर ही नया प्लास्टर चढ़ाकर खानापूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण कार्य में सीमेंट का इस्तेमाल न के बराबर है, जिससे सड़क का ढांचा बेहद कमजोर है। घटिया निर्माण और संकरे मार्ग के कारण क्षेत्र में आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है, जिससे ग्रामीणों में गहरा रोष है।

​प्रशासन पर टालमटोल का आरोप

​आंदोलनकारियों ने जिला प्रशासन और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन केवल जांच का आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देता है। अधिकारियों की इसी टालमटोल वाली नीति ने ग्रामीणों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है।

​हजारों की संख्या में घेराव की चेतावनी

​तहसील परिसर में अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सड़क मार्ग को गुणवत्तापूर्ण तरीके से दुरुस्त करने के लिए तुरंत ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में चारों गांवों के हजारों ग्रामीण जोशीमठ पहुंचकर प्रशासन का घेराव करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि अब यह लड़ाई केवल सड़क की नहीं, बल्कि उनके हक और सुरक्षा की है, जिसे वे अंतिम अंजाम तक पहुँचाकर रहेंगे।

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