कोटद्वार। धर्मशिला नारायणा कैंसर अस्पताल मयूर विहार दिल्ली के कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ अंशुमान कुमार ने कहा कि प्राचीन जीवन पद्धति और संतुलित भोजन अपनाकर हम कैंसर से बचाव कर सकते हैं।सरकार को भी चाहिए कि वह इस रोग के इलाज का विकेंद्रीकरण करने के साथ ही दवाइयों और जांचों की दरें तय कर लोगों को सस्ते इलाज की सुविधा मुहैया कराए। लैंसडौन से दिल्ली लौटते वक्त वह कोटद्वार के एक होटल में पत्रकारों से मुखातिब हुए।उन्होंने कहा कि नॉनस्टिक बर्तन, प्लास्टिक आदि के प्रयोग से एंडो हार्मोंस डिसबैलेंस हो जाता है, जिससे महिलाओं में पीरियड में गड़बड़ी, बांझपन आदि समस्याएं होने लगती हैं। पुरुषों में नपुंसकता की समस्या पैदा होती है, जो आगे चलकर कैंसर को जन्म देती है।
मोटापा विशेषकर कमर और पुष्ठ भाग का मोटापा इसका मुख्य कारण है। इसके अलावा बेवजह का तेनाव, मोबाइल के ज्यादा प्रयोग से भी कैंसर हो सकता है।जहां तक संभव हो दैनिक जीवन में मिट्टी, लोहे और पीतल के बर्तन ही इस्तेमाल होने चाहिए। एल्यूमीनियम और तांबे के बर्तन का प्रयोग नहीं होना चाहिए। कैंसर दिल को छोड़कर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।जिसमें गले का कैंसर, स्तन कैंसर, बच्चेदानी का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, पित्त की थैली का कैंसर, बड़ी आंत का कैंसर आदि शामिल हैं। कहा कि व्यक्तिगत जीवनशैली में सुधार कर और प्राचीन जीवन शैली को अपनाकर ही हम इस रोग से बच सकते हैं। इसके लिए आठ घंटे की नींद जरूरी है।फास्ट फूड और डिब्बा बंद फूड आदि कैंसर को बढ़ावा देते हैं। चीनी और मैदे की बनी चीजों का सेवन कम से कम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के नाम पर कैंसर पीड़ितों को ठगा जा रहा है। केंद्र सरकार को इस पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए।सामान्य अस्पतालों में कैंसर के बेसिक उपचार की सुविधा होनी चाहिए। साथ ही प्रत्येक राज्य की राजधानी में कैंसर अस्पताल बनाया जाना चाहिए, जहां सर्जरी की सुविधा भी उपलब्ध हो। इस मौके पर दंत रोग विशेषज्ञ डॉ राजीव अरोड़ा भी मौजूद रहे।

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