ऋषिकेश : पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर ऋषिकेश में  देव भूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत 12 दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर श्री देव सुमन  उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जोशी ने उद्घाटन भाषण में लोगो को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय तथा उत्तराखंड सरकार उद्यमिता के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विद्यार्थी अपनी परंपरागत सोच से इतर नवाचारों के साथ अपने बिजनेस प्लेन को प्रस्तुत करें। उत्तराखंड सरकार की देवभूमि उद्यमिता योजना के साथ ही विश्वविद्यालय भी ऐसे  छात्र /छात्राओं को सीड फंड के रूप में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा । इसके लिए विद्यार्थी रिस्क लेकर जोखिम से बिना घबराए नए बिजनेस प्लान को मार्केट में ले आए । उन्होंने कहा कि बिजनेस के लिए छोटे-छोटे आइडिया और एक छोटी रकम से भी शुरुआत करके बड़े लक्ष्य को पाया जा सकता है । वर्तमान  समय में ए. आई. टूल तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे कई क्षेत्रों में स्टार्टअप के अनेक अवसर विद्यमान है ।छात्र/छात्राएं इस वर्कशॉप में विशेषज्ञों से इस बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर अपने उद्यम को प्रारंभ कर सकते हैं ।

वाइस चांसलर प्रो. एन.के. जोशी ने कहा, “आज का युग प्रतिस्पर्धा और नवाचार का है। पारंपरिक नौकरियों की सीमाएं कम हो रही हैं, और स्वरोज़गार एवं स्टार्टअप्स का युग आ गया है। उद्यमिता केवल व्यवसाय शुरू करने का माध्यम नहीं, बल्कि यह एक दृष्टिकोण है जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करता है। हमारे विश्वविद्यालय में “Centre of Excellence in Entrepreneurship and Innovation” की स्थापना की गई है, जो पर्यटन क्षेत्र पर केंद्रित है। यह केंद्र 14 जून 2024 को देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत हुआ। इसका उद्देश्य 50 व्यापार और स्टार्टअप मेंटर्स का एक पूल तैयार करना है, जो युवा उद्यमियों को मार्गदर्शन देंगे। यह कार्यक्रम छात्रों को न केवल शिक्षित करेगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और नवाचार की ओर प्रेरित करेगा।”

देवभूमि उद्यमिता योजना के नोडल अधिकारी प्रोफेसर अनिता तोमर ने उद्यमिता विकास कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।  प्रोफेसर तोमर ने बताया कि बताया कि ऋषिकेश, जो वैश्विक योग और ध्यान केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है, यहाँ की पर्यटन आवश्यकताओं के लिए एक कस्टमाइज्ड हब और स्पोक मॉडल लागू किया जाएगा। इस दौरान, हम छात्रों को MSME नीति 2015, वीर चंद्र गढ़वाली स्वरोजगार योजना, होम स्टे योजना, और उत्तराखंड पर्यटन नीति 2018 जैसी सरकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान करेंगे। प्रोफेसर तोमर ने कहा  कि कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके विचारों को सफल व्यवसायों में परिवर्तित करने में सहायता करना है। यह दो सप्ताह का कार्यक्रम विभिन्न विषयों जैसे स्टार्टअप और उद्यमिता आइडियाज, ब्रांडिंग और फंडिंग, उत्तराखंड के पर्यटन, योग, आयुर्वेद, हर्बल उद्योग, और देवभूमि उद्यमिता योजना पर केंद्रित रहेगा। कार्यक्रम के दौरान, 08 मार्च को एक स्टार्टअप प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जिसमें छात्रों और स्थानीय उद्यमियों को अपने स्टार्टअप विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

इस अवसर पर प्रो. महावीर सिंह रावत ने उत्तराखंड सरकार और विश्वविद्यालय द्वारा उद्यमिता विकास के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों से  छात्र/छात्राओं को अधिक से अधिक जुड़ने और उससे लाभ पाने के लिए प्रेरित किया। प्रो. रावत ने कहा “हम अपने छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें नवाचार और व्यावसायिक दृष्टि से तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। मान्या राजपाल, जो हमारी छात्रा हैं, ने देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत राज्य सरकार से ₹75,000 की सीड फंडिंग प्राप्त की है। उन्होंने कहा, “मेरा उद्देश्य वेलनेस और स्पिरिचुअलिटी सेंटर स्थापित करना है, जो लोगों को योग और ध्यान सेवाएँ प्रदान करेगा।”

कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर अंजनी दूबे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर धर्मेंद्र तिवारी ने दिया। प्रो. धर्मेंद्र तिवारी ने कहा, “हम उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। हमारा उद्देश्य छात्रों को सही दिशा में मार्गदर्शन देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। प्रतिभागियों ने स्टार्टअप विचारों के विकास और व्यावसायिक मॉडल तैयार करने पर गहन कार्यशालाओं में भाग लिया। विशेषज्ञों ने उन्हें वित्तीय प्रबंधन, मार्केटिंग रणनीतियों और निवेशकों को आकर्षित करने की तकनीकों पर मार्गदर्शन दिया।

देवभूमि उद्यमिता योजना के प्रोजेक्ट अधिकारी अभिषेक नंदन और मैटर शशि भूषण बहुगुणा ने 12 दिवसीय इस उद्यमिता कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को अपना उद्यम शुरू करने में आने वाली कठिनाइयों उनके निराकरण और वित्तीय सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की । अभिषेक नंदन ने कहा “हमारा उद्देश्य नवोदित उद्यमियों को सही मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराना है ताकि वे अपने स्टार्टअप्स को सफल बना सकें। उद्यमिता केवल एक व्यवसाय शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मानसिकता और दृष्टिकोण है, जो किसी भी युवा को आत्मनिर्भर और नवाचार-प्रधान सोच विकसित करने में सहायता करता है। देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत हम उत्तराखंड के युवाओं को विशेष रूप से उन क्षेत्रों में प्रोत्साहित कर रहे हैं, जहां स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके सतत विकास संभव हो। आज के दौर में स्टार्टअप कल्चर पूरे देश में तेजी से बढ़ रहा है, और उत्तराखंड के युवाओं के पास भी इस परिवर्तन का हिस्सा बनने का शानदार अवसर है। हम इस योजना के माध्यम से न केवल वित्तीय सहायता प्रदान कर रहे हैं, बल्कि बिजनेस मॉडल डेवलपमेंट, मार्केटिंग, ब्रांडिंग, नेटवर्किंग और सरकारी नीतियों की जानकारी देकर उन्हें संपूर्ण रूप से तैयार करने पर जोर दे रहे हैं।”

शशि भूषण बहुगुणा, ने कहा “युवा उद्यमियों को एक सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है, जिससे वे अपने नवाचारों को वास्तविकता में बदल सकें। किसी भी नए व्यवसाय या स्टार्टअप की सफलता के लिए केवल एक अच्छा विचार पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसे सही मार्गदर्शन, नेटवर्क और वित्तीय सहायता की भी आवश्यकता होती है। देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत हम छात्रों और नवोदित उद्यमियों को एक व्यापक सहायता प्रणाली प्रदान कर रहे हैं, जिसमें उद्योग विशेषज्ञों, सफल उद्यमियों और मेंटर्स का एक मजबूत नेटवर्क शामिल है। यह मेंटॉरशिप नेटवर्क युवाओं को उनके बिजनेस आइडिया को वास्तविकता में बदलने, बाजार की जरूरतों को समझने, और स्थायी व्यवसाय मॉडल विकसित करने में मदद करेगा। हमारा प्रयास है कि उत्तराखंड का हर युवा, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्र, उद्यमिता को एक करियर विकल्प के रूप में अपनाने में सक्षम हों और राज्य के आर्थिक विकास में योगदान दें।”

इस कार्यक्रम के अवसर पर देवभूमि  उद्यमिता योजना के मैटर प्रोफेसर अंजनी प्रसाद दुबे, प्रोफेसर धर्मेंद्र तिवारी, डॉ. शालिनी रावत, योगाचार्य रमित चौधरी, प्रोफेसर वीके श्रीवास्तव , प्रोफेसर बी एन. गुप्ता,  अभिषेक नंदन, और शशि भूषण बहुगुणा, सहित 45 से अधिक प्रतिभागी उपस्थित रहे ।

 

 

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