हरिद्वार : राष्ट्रीय आयुष मिशन के तत्वावधान में चल रहे पोषण पखवाड़ा-2025 के अंतर्गत हरिद्वार जिले के 12 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में विशेष स्वास्थ्य एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का आयोजन जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. स्वास्तिक सुरेश और राष्ट्रीय आयुष मिशन के नोडल अधिकारी डॉ. अवनीश उपाध्याय के समन्वय में किया गया।

पोषण सुधार को लेकर चलाया विशेष जागरूकता अभियान

पोषण पखवाड़ा के दौरान गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, किशोरियों और 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के पोषण परिणामों में सुधार लाने के लिए अनेक गतिविधियाँ संचालित की गईं। इस पहल के माध्यम से कुपोषण जैसी समस्याओं से निपटने, सही आहार के महत्व को समझाने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।
इस अवसर पर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. स्वास्तिक सुरेश ने बताया, “पोषण संबंधी जानकारी देकर हम समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों को सशक्त बनाने का कार्य कर रहे हैं। सही पोषण से ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सकता है।”
नोडल अधिकारी डॉ. अवनीश उपाध्याय ने भी कार्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “पोषण पखवाड़ा हमें यह अवसर देता है कि हम कुपोषण जैसी जटिल समस्या के समाधान हेतु जमीनी स्तर पर सार्थक प्रयास करें। छोटे-छोटे बदलाव बड़े परिणाम ला सकते हैं।”

इस विशेष अभियान के अंतर्गत ये गतिविधियाँ संचालित की गईं

  • स्वास्थ्य जागरूकता शिविर : पोषण से जुड़े मुद्दों पर परामर्श और उपचार सेवाएं दी गईं।
  • योग एवं जीवनशैली कार्यशालाएं : योग के माध्यम से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
  • खेल व रचनात्मक गतिविधियाँ : बच्चों में स्वास्थ्य के प्रति रुचि जगाने के लिए खेल प्रतियोगिताएं कराई गईं।
  • व्याख्यान एवं संवाद सत्र : पोषण, स्तनपान, पूरक आहार और स्वच्छता पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान आयोजित किए गए।

प्रमुख चिकित्साधिकारियों की भूमिका

अभियान को सफल बनाने में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के चिकित्साधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉ. धनेन्द्र वशिष्ठ (बिहारी नगर), डॉ. नवीन दास (सालियर), डॉ. सोरमी सोनकर (भोगपुर), डॉ. विशाल प्रभाकर (दौलतपुर), डॉ. मोनिका प्रभाकर (बहादराबाद), डॉ. विक्रम सिंह रावत (डाडा जलालपुर) और डॉ. बीरेंद्र सिंह रावत (हल्लू माजरा) ने अपने-अपने केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित कर स्थानीय समुदाय को पोषण के महत्व से अवगत कराया। इन चिकित्सकों ने प्रतिभागियों को यह समझाया कि कुपोषण केवल भोजन की कमी नहीं, बल्कि पोषक तत्वों के असंतुलन का परिणाम भी हो सकता है। सही ज्ञान और सतत अभ्यास से इसे हराया जा सकता है।

प्रतिभागियों ने लिया संकल्प

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित महिलाओं, किशोरियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने यह संकल्प लिया कि वे सही पोषण अपनाएंगे और अपने परिवार व समुदाय में भी इसका प्रचार-प्रसार करेंगे।
“स्वस्थ बचपन ही सशक्त भारत की नींव है।”
“हर थाली में संतुलित आहार, तभी बनेगा निरोग संसार।”
 
 

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