गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के 14 वाइब्रेंट विलेज में आर्मी, आईटीबीपी तथा जिला प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।

वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमांत गांवों के विकास को लेकर जिलाधिकारी संदीप तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में आर्मी तथा आईटीबीपी अधिकारियों को वाइब्रेंट विलेज के अंतर्गत निर्माणाधीन और प्रस्तावित कार्यों की फोटो समेत विवरण जिला प्रशासन को उपलब्ध कराए जाने को कहा गया। बैठक में कहा गया कि इससे कार्यों में डुप्लीकेसी (दोहराव) नहीं होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

मुख्य विकास अधिकारी डॉ अभिषेक त्रिपाठी ने सुझाव दिया कि आर्मी और आईटीबीपी के साथ जिला प्रशासन के समन्वय के लिए  सेना की ओर से एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। नोडल सभी संबंधित कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग कर  डिटेल जिला प्रशासन को समय समय पर उपलब्ध करा सकेंगे।

डीएम ने निर्देश दिए कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को समायोजित कर वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत  सीमांत गावों का समग्र विकास किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर योजनाओं को समयबद्ध ढंग से क्रियान्वित करने पर जोर दिया। कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में स्थित गांवों में मूलभूत सुविधाओं को विकसित कर वहां रहने वाले नागरिकों के लिए आजीविका के अवसर और जीवन स्तर में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि इन गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, आवास, बिजली, संचार और सड़क जैसी सुविधाओं को विकसित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

परियोजना निदेशक आनंद सिंह ने बताया कि जनपद चमोली के अंतर्गत आने वाले कुल 14 सीमांत गांवों को वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत विकसित किया जाना है। इन गांवों में अवस्थापना सुविधाओं के साथ-साथ पर्यटन, हस्तशिल्प, रोजगार गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

बैठक में अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश, जिला विकास अधिकारी केके पंत, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अभिषेक गुप्ता, जिला पर्यटन अधिकारी अरविन्द गौड़ और अन्य जिला स्तरीय अधिकारी सहित सेना और आईटीबीपी के अधिकारी वर्चुअल  माध्यम से जुड़े रहे।

 

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