ज्योतिर्मठ। नगर क्षेत्र में भू-धंसाव की त्रासदी के बाद आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत प्रशासन द्वारा घरों और होटलों को सील करने की कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि वे पहले ही विस्थापन, आजीविका और आवास संकट से जूझ रहे हैं, ऐसे में नवनिर्माण कार्यों पर रोक और सीलिंग की कार्रवाई उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है।

स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाए हैं कि वर्ष 2023 के भू-धंसाव के दौरान जिन भवन स्वामियों और होटल संचालकों को सरकार की ओर से लाखों और करोड़ों रुपये का मुआवजा दिया गया था, वे आज फिर उन्हीं असुरक्षित भवनों में कैसे रह रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि मुआवजा वितरण के तुरंत बाद क्षतिग्रस्त भवनों को ध्वस्त कर मलबा नगर से बाहर किया गया होता, तो आज यह स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।

वहीं इस मामले पर उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने स्पष्ट किया कि मुआवजा प्राप्त करने वाले परिवारों ने शपथ पत्र के माध्यम से यह प्रतिबद्धता जताई थी कि वे क्षतिग्रस्त भवनों में पुनः निवास नहीं करेंगे। शपथ पत्र के उल्लंघन की स्थिति में आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में देश के नौ प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा ज्योतिर्मठ की संवेदनशीलता को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई थी। इस रिपोर्ट में CSIR-CBRI रुड़की, WIHG देहरादून, GSI देहरादून, IIRS देहरादून और CSIR-NGRI हैदराबाद के वैज्ञानिक शामिल थे। रिपोर्ट में नगर क्षेत्र में पक्के निर्माण को गंभीर खतरा बताते हुए ड्रेनेज और सीवर व्यवस्था सुधारने, अलकनंदा नदी के तट पर सुरक्षात्मक कार्य करने तथा नगर की भार क्षमता कम करने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए थे।

वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, सरकार द्वारा घोषित 70 करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज में से अब तक 59.10 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। इसमें 222 परिवारों को 47.71 करोड़ रुपये का अंतिम मुआवजा दिया गया है, जबकि 669 लाभार्थियों को अग्रिम सहायता प्रदान की गई है। इस अग्रिम सहायता के तहत मकान मालिकों को 1.5 लाख रुपये और किराएदारों को 50 हजार रुपये की राशि दी गई है।

फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई और जनता के आक्रोश के बीच ज्योतिर्मठ में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और स्थानीय लोग इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति व स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

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