ज्योतिर्मठ। अलकनंदा एवं लक्ष्मण गंगा की ऊँची पहाड़ियों पर बीते पाँच दिनों से धधक रही भीषण वनाग्नि अब धीरे-धीरे नियंत्रण में आती प्रतीत हो रही है। हालांकि 9 जनवरी से जारी इस आग के चलते मंगलवार सायं तक पर्वत चोटियों से धुएँ के घने गुबार उठते देखे गए, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना रहा।

वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल के नेतृत्व में वन विभाग की टीम पिछले चार दिनों से लगातार आग पर काबू पाने में जुटी हुई है। किंतु अत्यधिक ऊँचाई, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ और खड़ी चट्टानें प्रभावित क्षेत्र तक सीधे पहुँचने में बड़ी बाधा बनी हुई हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए विभाग द्वारा प्रशासन से हेलीकॉप्टर सहायता की भी मांग की गई है।

इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में वन विभाग की टीम ने मानवीय प्रयासों के साथ-साथ आस्था का सहारा भी लिया। मंगलवार को पुलना गाँव में ग्रामीणों के साथ मिलकर इष्टदेव ‘बगड़वाल देवता’ की विशेष पूजा-अर्चना कर वर्षा और अग्नि शमन की कामना की गई।

इसके पश्चात वन कर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए नेपाली श्रमिकों के सहयोग से लक्ष्मण गंगा नदी पर एक अस्थायी पुल का निर्माण कर नदी पार की। इस अभियान में ग्राम प्रधान आनंद चौहान, महिला मंगल दल तथा स्थानीय ग्रामीणों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर सक्रिय सहयोग दिया।

हालांकि खड़ी चट्टानों और मार्ग अवरुद्ध होने के कारण टीम मंगलवार को मुख्य प्रभावित स्थल तक नहीं पहुँच सकी। इसके चलते अब बुधवार प्रातः अलकनंदा नदी के रास्ते वैकल्पिक मार्ग से प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश कर आग पर नियंत्रण के प्रयास तेज करने का निर्णय लिया गया है।

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