ज्योतिर्मठ। तपोवन विष्णुगाढ जल विद्युत परियोजना के निर्माण स्थल पर पिछले तीन दिनों से भारी सन्नाटा पसरा हुआ है। अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत ग्रामीणों के कड़े रुख के कारण एनटीपीसी परियोजना का कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया है, जिससे कंपनी को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है। प्रभावित गांवों के ग्रामीण 1 अप्रैल से बैराज साइट तपोवन, टीवीएम साइट सेलंग और अनिमठ साइट पर सुबह से ही मोर्चा संभाल लेते हैं और क्रमिक अनशन के माध्यम से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ज्योतिर्मठ विकासखंड के प्रधान संघ अध्यक्ष मोहन बैंजवाल का कहना है कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्याओं को अनसुना किया है, जिसके चलते उन्हें इस कड़े विरोध के लिए बाध्य होना पड़ा।

ग्रामीणों के इस आक्रोश का मुख्य कारण दो परियोजनाओं के बीच मुआवजे की नीति में अंतर है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि एक ही विकासखंड में कार्यरत टीएचडीसी (THDC) द्वारा प्रभावित काश्तकारों को वार्षिक 30 हजार रुपये ‘चारापत्ती मुआवजा’ दिया जाता है, जबकि एनटीपीसी ने इस मांग पर चुप्पी साध रखी है। ग्रामीणों ने तीखे सवाल दागते हुए पूछा कि आखिर एक ही क्षेत्र में दो अलग-अलग नियम क्यों लागू हैं? चारापत्ती मुआवजे के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार देने, फरवरी 2021 की त्रासदी में मारे गए लोगों के आश्रितों को नौकरी प्रदान करने, श्मशान घाटों के विकास और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करने जैसे अहम मुद्दे इस 15 सूत्रीय मांग पत्र का हिस्सा हैं।

वहीं, इस पूरे विवाद पर एनटीपीसी प्रबंधन का अपना अलग पक्ष है। कंपनी प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने प्रभावित गांवों की जमीन, जल, जंगल और गोचर भूमि का पहले ही ‘वन टाइम सेटलमेंट’ यानी एकमुश्त भुगतान कर दिया है, इसलिए तकनीकी रूप से अब वार्षिक चारापत्ती मुआवजा देना संभव नहीं है। कंपनी के इस रुख को ग्रामीणों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सेलंग की ग्राम प्रधान रोशना बिष्ट और क्षेत्र पंचायत सदस्य वर्षा बिष्ट ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कंपनी प्रशासन ने जल्द ही उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो इस आंदोलन को और भी उग्र व व्यापक रूप दिया जाएगा।

धरना स्थल पर ग्रामीण एकजुटता दिखाते हुए डटे हुए हैं, जिनमें वन पंचायत सरपंच शिशुपाल भंडारी, महिला मंगल दल की अध्यक्ष सरिता देवी, पंकज बिष्ट, लक्ष्मण सिंह पंवार, और भारी संख्या में ग्रामीण महिलाएं शामिल हैं। आंदोलनकारियों का सीधा आरोप है कि कंपनी स्थानीय लोगों की अनदेखी कर बाहरी लोगों को रोजगार दे रही है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन वार्ता का कोई ठोस मंच तैयार न होने के कारण यह गतिरोध समाप्त होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

 

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