चमोली । विश्व प्रसिद्ध हिम क्रीड़ा स्थल औली अब केवल साहसिक खेलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी आध्यात्मिक पहचान के लिए भी जाना जाएगा। औली स्थित ‘श्री हनुमान मंदिर संजीवनी शिखर’ को आधिकारिक रूप से धार्मिक पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की दिशा में पहल तेज हो गई है। इस संबंध में हनुमान मंदिर न्यास ने जिलाधिकारी चमोली को एक मांग पत्र सौंपा है।

पौराणिक आस्था का प्रमुख केंद्र

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में जब भगवान हनुमान लक्ष्मण के प्राण बचाने हेतु संजीवनी बूटी लेने हिमालय आए थे, तब उन्होंने इसी शिखर से संजीवनी पर्वत की पहचान की थी। इसी कारण यह स्थल ‘संजीवनी शिखर’ के नाम से प्रसिद्ध है।

वर्तमान में यह स्थान न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं बल्कि ट्रेकर्स और पर्यटकों के लिए भी आस्था का केंद्र बना हुआ है।

हनुमान जन्मोत्सव पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

यहाँ प्रतिवर्ष हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर विशाल भंडारे (अन्नदान) का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आयाम

हनुमान मंदिर न्यास के सदस्य वैभव सकलानी ने बताया कि यदि संजीवनी शिखर को धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाता है, तो इससे शीतकालीन पर्यटन के साथ-साथ आध्यात्मिक पर्यटन (Spiritual Tourism) को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को औली के पौराणिक और ऐतिहासिक पक्ष से परिचित होने का अवसर मिलेगा, साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

प्रशासन का सकारात्मक रुख

जनभावनाओं और धार्मिक महत्व को देखते हुए जिलाधिकारी गौरव कुमार ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक आश्वासन दिया। उन्होंने कहा,

“प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से कार्य करेगा। जल्द ही पर्यटन विभाग के साथ बैठक कर मंदिर को धार्मिक पर्यटन मानचित्र से जोड़ने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।”

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने स्वयं मंदिर पहुंचकर भगवान बजरंगबली की विशेष पूजा-अर्चना की और जिले की सुख-समृद्धि की कामना की।

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