कोटद्वार। ढोल की थाप दमाऊं मशक की मधुर ध्वनी से  मनियारस्यूं कल्जीखाल की घाटी गूंज उठी । जहां 108 महिला पीत वस्त्र में पहाड़ी भेषभूषा में शिर पर कलश लिए बांकेश्वर महादेव मंदिर से चोपड़ा कथा स्थल पर पहुंचकर विद्वान ब्राह्मणों नें वेदमंत्र उच्चारण कर  लड्डू गोपाल का स्नान अभिषेक मुख्य यजमान प्रमुख द्वारीखाल महेन्द्र सिंह राणा एवं ब्लॉक प्रमुख कल्जीखाल बीना राणा ने किया । वहीं प्रसिद्ध कथा व्यास  आचार्य शिव प्रसाद ममगाई ने अपनें आर्शीवचन में कहा कि कलश यात्रा मंगल सूचक है ही लेकिन अपनें स्थानीय देवताओं को निमंत्रण देना, आवाह्न करना, पीत वस्त्र शिर पर कलश का मतलब भगवान कृष्ण हर समय पिताम्बर ओडके रखते हैं अर्थात जो वस्त्र सिला नहीं होता, वही राधा है, राधा का उल्टा करेगें तो धारा होता है । जलधारा को राधारमण मानकर लड्डूगोपाल से मिलन का एक मतलब बनता है वहीं ब्लॉक प्रमुख महेन्द्र राणा  एवं कल्जीखाल प्रमुख बीना राणा नें सबका स्वागत किया । महेन्द्र राणा नें अपने उद्बोधन में कहा    कि भीड़ अधिक होनें के कारण कलश यात्रा व भण्डारा पहले दिन बुधवार को ही रखा गया । यह कथा 16 नवम्बर से 22 नवम्बर तक चलेगी । उन्होंने आह्वान किया कि सब कथाप्रेमी अपनें इष्टमित्र गणो के साथ नित्य 12 बजे से  4 बजे सायं तक कथा श्रवण करते हुए धर्म लाभ उठाएं ।

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