राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव का खाका तैयार कर लिया है। हरियाणा के समालखा में तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की बैठक के अंतिम दिन रविवार को यह प्रस्ताव अंतिम रूप दिया गया। सबसे अहम बदलाव उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के संगठन में किया गया है, जहां दोनों राज्यों को मिलाकर ‘उत्तर क्षेत्र’ (उत्तर क्षेत्र) बनाने का फैसला हुआ है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है।

संघ के सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव शताब्दी वर्ष (2025-2026) के बाद चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। फिलहाल नई नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं, लेकिन मार्च 2027 तक नई संरचना के आधार पर पदाधिकारियों की तैनाती हो सकती है। देश को अब 9 क्षेत्रों और लगभग 80-85 संभागों में बांटा जाएगा। प्रांत प्रचारक पद समाप्त हो जाएगा, जबकि संभाग स्तर पर स्थानीय शाखाओं, प्रशिक्षण वर्गों और सामाजिक गतिविधियों का संचालन अधिक प्रभावी होगा।

उत्तर प्रदेश में 10 संभाग

उत्तर प्रदेश में कुल 10 संभाग बनाए जाएंगे, जिनमें मेरठ, ब्रज, बरेली, लखनऊ, कानपुर, झांसी, प्रयागराज, अयोध्या, काशी और गोरखपुर शामिल हैं। उत्तर क्षेत्र में यूपी और उत्तराखंड की अलग-अलग इकाइयां कार्य करेंगी, जिससे दोनों राज्यों में संघ की गतिविधियों का बेहतर समन्वय और विस्तार संभव होगा।

संघ के लिए उत्तर प्रदेश हमेशा से प्रमुख कार्यक्षेत्र रहा है, जहां शाखाओं, प्रशिक्षण और सामाजिक कार्यक्रमों की संख्या सबसे अधिक है। उत्तराखंड के साथ मिलाकर क्षेत्र बनाने से संगठन को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पश्चिमी यूपी में नए पदाधिकारी

सूत्रों के मुताबिक, ब्रज क्षेत्र के पूर्व प्रांत प्रचारक और वर्तमान सह क्षेत्र संपर्क प्रमुख हरीश रौतेला को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र संपर्क प्रमुख बनाया जाएगा। वहीं, मनोज मिखरा को पश्चिमी यूपी का क्षेत्रीय संगठन मंत्री नियुक्त करने पर सहमति बनी है।

आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बैठक के बाद बताया कि संगठन में विकेंद्रीकरण पर जोर दिया गया है। प्रांत व्यवस्था के स्थान पर छोटे संभाग बनाने से जमीनी स्तर पर कार्यकुशलता बढ़ेगी। बैठक में संघ के विस्तार पर भी चर्चा हुई, जहां शाखाओं की संख्या 88,949 से अधिक और स्थान 55,683 हो गए हैं। अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और जनजातीय क्षेत्रों में भी संघ पहुंच चुका है।

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