ज्योर्तिमठ : नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत विश्व प्रसिद्ध ‘फूलों की घाटी’ और उसके समीपवर्ती उच्च हिमालयी क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। शीतकाल के दौरान वन्यजीवों के संरक्षण और अवैध शिकार पर अंकुश लगाने के लिए चलाया गया 06 दिवसीय विशेष शीतकालीन गश्त एवं ड्रोन सर्वे अभियान शनिवार, 21 फरवरी 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 16 फरवरी को गोविंदघाट से रवाना हुआ 11 सदस्यीय गश्ती दल घांघरिया और भ्यूंडार घाटी के दुर्गम क्षेत्र ‘सिमर टोली’ जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों का सघन निरीक्षण कर वापस लौट आया है। इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक गश्त का मेल रही, जिसके सुखद परिणाम सामने आए हैं।

फूलों की घाटी वन क्षेत्र अधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि पार्क प्रशासन द्वारा क्षेत्र में स्थापित कैमरा ट्रैप्स की जांच में अत्यंत उत्साहजनक तस्वीरें कैद हुई हैं। गश्त के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों के दुर्लभ और शर्मीले वन्यजीवों, विशेषकर हिम तेंदुए (Snow Leopard), कस्तूरी मृग (Musk Deer) और राज्य पक्षी मोनाल की सक्रियता पाई गई है। इसके अतिरिक्त गुलदार, लेपर्ड कैट, भालू, हिमालयन सेरो, थार, येलो थ्रोटेड मार्टन और रेड फॉक्स की मौजूदगी ने यह सिद्ध कर दिया है कि पार्क का पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह सुरक्षित और समृद्ध है। निगरानी को पुख्ता करने के लिए पहली बार फूलों की घाटी और घांघरिया के उन दुर्गम हिस्सों में ड्रोन सर्वे का सहारा लिया गया, जहाँ मानवीय पहुंच लगभग असंभव है। हवाई सर्वेक्षण के माध्यम से टीम ने दूरस्थ चोटियों और घाटियों की बारीकी से जांच की।

राहत की बात यह रही कि पूरे 06 दिनों के इस सघन अभियान और आधुनिक निगरानी के दौरान पार्क क्षेत्र के भीतर किसी भी प्रकार की अवैध मानवीय गतिविधि, घुसपैठ या शिकार के साक्ष्य नहीं मिले हैं। इस साहसिक अभियान को अनुभाग अधिकारी जय प्रकाश के नेतृत्व में वन बीट अधिकारी नरेंद्र सिंह, सुशील चौहान, नागेंद्र सिंह, अजय सिंह रावत और वन आरक्षी मान सिंह, अरविंद सिंह, प्रीतम सिंह, मनोज भट्ट सहित वनीकरण वॉचर्स और पोर्टर्स की टीम ने अंजाम दिया। भारी बर्फबारी और विषम परिस्थितियों के बीच टीम ने सुरक्षित लौटकर अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है।

 

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