कोटद्वार : गढ़वाल के द्वार कहे जाने वाले कोटद्वार में अध्यक्ष उत्तराखण्ड गौ सेवा आयोग डॉ. पण्डित राजेन्द्र अणथ्वाल ने हरेला पर्व पर  पर्यावरण संरक्षण एवं सवंर्धन को लेकर फलदार, छायादार, औषधि वाले पौधो का पौधारोपण किया ।  इस अवसर पर उन्होंने ने कहा कि धरती की हरियाली जीवन के लिए खुशहाली है। पेड़ पौधे धरती के श्रृंगार हैं यह धरती हमें सब कुछ देती है। तो हमें भी धरती के लिए कुछ देना चाहिए, और जब धरती का श्रृंगार वृक्ष है तो वृक्ष लगाकर ही धरती माता को सुंदर बनाए रखें यह हम सभी मानव जाति का कर्तव्य है ।

अध्यक्ष उत्तराखण्ड गौ सेवा आयोग डॉ. पण्डित राजेन्द्र अणथ्वाल ने कहा कि पेड़ पौधों के बिना मानव जीवन की कल्‍पना नहीं की जा सकती है। पेड़ पौधे हमें जीवन दायनी ऑक्‍सीजन देते हैं, जिससे जीव-जंतु जीवित रहते हैं। लेकिन, वर्तमान में जिस प्रकार पेड़ों को काटने का कार्य किया जा रहा है। जंगलों को काटकर वहां पर कंकरीट के भवन बन रहे हैं, जो पर्यावरण के लिए चिंताजनक है। पर्यावरण का संतुलन बिगड़ने के कारण आज प्राकृतिक आपदाएं आ रही हैं। धरती का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। गर्मी, सर्दी और बारिश पिछले सभी रिकार्ड तोड़ रही है। इसी प्रकार अगर पर्यावरण की उपेक्षा की गई तो भविष्‍य में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

अध्यक्ष उत्तराखण्ड गौ सेवा आयोग डॉ. पण्डित राजेन्द्र अणथ्वाल ने कहा कि हरेला पर्व का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ना एवं उनके हृदय में प्रकृति के प्रति प्यार व संवेदना उत्पन्न करना है। हिमालयी क्षेत्र उत्तराखण्ड का पर्यावरण की रक्षा में अपना सदियों से विशिष्ट योगदान रहा है और उत्तराखण्डियों ने सदियों से हरेला पौराणिक पर्व के माध्यम से पर्यावरण को संरक्षित करने का कार्य किया है । भावी पीढ़ी को शुद्ध वतावरण देने के लिए सबको वृक्षारोपण और जल संरक्षण की दिशा में कार्य करने होंगे। 




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