देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखण्ड शासन एवं भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के मध्य स्वस्थ सीमा अभियान के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत एवं कैबिनेट मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा भी मौजूद रहे।

इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य पिथौरागढ़, चमोली एवं उत्तरकाशी जनपदों के अंतर्गत स्थित 108 सीमावर्ती गांवों में निवासरत नागरिकों को एकीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। अभियान को चरण–1 के रूप में प्रारंभ किया जा रहा है, जिससे दुर्गम एवं सीमांत क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

समझौते के तहत भारत–तिब्बत सीमा पुलिस, मुख्यालय उत्तरी सीमांत, देहरादून को प्रथम पक्ष तथा चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड सरकार को द्वितीय पक्ष के रूप में नामित किया गया है। एमओयू के अनुसार आईटीबीपी द्वारा योग्य चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, उपलब्ध एमआई रूम एवं टेली-मेडिसिन सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। निर्धारित कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती गांवों का नियमित भ्रमण कर स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएंगी। साथ ही लाभार्थियों के मेडिकल हेल्थ कार्ड/रिकॉर्ड का संधारण एवं दवाइयों, उपकरणों व आवश्यक सामग्रियों का समुचित प्रबंधन किया जाएगा।

वहीं उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संबंधित गांवों के जनसांख्यिकीय आंकड़े उपलब्ध कराए जाएंगे तथा प्रारंभिक चरण में आवश्यक चिकित्सा उपकरण प्रदान किए जाएंगे। उपभोग के आधार पर प्रत्येक छह माह में दवाइयों एवं अन्य सामग्रियों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। आपातकालीन परिस्थितियों में निकासी, दूरसंचार सहायता तथा उपकरणों के प्रतिस्थापन की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार द्वारा निभाई जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वस्थ सीमा अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों में निवासरत नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल है। यह अभियान स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सीमांत गांवों में विश्वास, सुरक्षा और स्थायित्व को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर आईटीबीपी अधिकारियों ने जानकारी दी कि उत्तराखण्ड सरकार एवं आईटीबीपी के मध्य स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति को लेकर पूर्व में किए गए एमओयू के तहत नवंबर 2024 से 25 प्रतिशत आपूर्ति ट्रायल आधार पर तथा मार्च 2025 से 100 प्रतिशत आपूर्ति प्रारंभ कर दी गई है। इसके अंतर्गत जीवित भेड़/बकरी, जीवित मुर्गा, हिमालयन ट्राउट मछली, ताजा दूध, पनीर एवं टीपीएस जैसे उत्पादों की खरीद विभिन्न सहकारी संस्थाओं के माध्यम से की जा रही है। अब तक लगभग 3,79,650.23 किलोग्राम एवं 3,25,318.72 लीटर उत्पादों की खरीद की जा चुकी है, जिसकी अनुमानित लागत ₹11.94 करोड़ से अधिक है।

कार्यक्रम में वर्ष 2026 के लिए वाइब्रेंट बॉर्डर गांवों से स्थानीय उत्पादों की प्रस्तावित खरीद का विस्तृत विवरण भी प्रस्तुत किया गया। इसके तहत भेड़/बकरी, मुर्गा, हिमालयन ट्राउट मछली, पनीर, ताजा दूध, टीपीएस, सब्जियों एवं फलों की खरीद मिलाकर लगभग ₹32.76 करोड़ की अनुमानित लागत से बड़े पैमाने पर स्थानीय उत्पादों की खरीद प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पॉइंट टू पॉइंट मॉडल के माध्यम से किसानों एवं पशुपालकों से सीधी खरीद सुनिश्चित की गई है, जिससे 550 से अधिक सीमावर्ती ग्रामीणों को सीधा लाभ मिला है और मध्यस्थ व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हुई है। इससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है, रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहन मिला है तथा कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम और वोकल फॉर लोकल की अवधारणा को धरातल पर उतारने का सशक्त उदाहरण है, जो सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से एक सतत और प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रही है। कार्यक्रम में सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, आईजी आईटीबीपी संजय गुंज्याल सहित आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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