ज्योतिर्मठ। विश्व प्रसिद्ध हेमकुंड साहिब और यूनेस्को की विश्व धरोहर फूलों की घाटी की ऊँची हिमालयी चोटियाँ इन दिनों भीषण वनाग्नि की चपेट में हैं। फूलों की घाटी रेंज में भड़की आग ने पूरे क्षेत्र को धुएँ के घने गुबार में बदल दिया है, जिससे न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को गहरा आघात पहुँचा है, बल्कि संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र भी गंभीर संकट में आ गया है।

वनाग्नि की इस भयावह घटना में लाखों रुपये मूल्य की बेशकीमती वन संपदा जलकर राख हो रही है। वहीं, इस क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ एवं संरक्षित वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा है। आग की विकराल लपटें दूर-दूर तक दिखाई दे रही हैं और चारों ओर फैला धुआँ पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचा रहा है।

वन विभाग की टीमें जान जोखिम में डालकर आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। हालांकि, अत्यधिक ऊँचाई, दुर्गम पहाड़ी भूभाग और सीमित संसाधनों के कारण आग बुझाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विषम परिस्थितियों के चलते राहत और नियंत्रण कार्य चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शीघ्र ही आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो इससे हिमालयी क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिक संतुलन को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है, जिसका असर आने वाले वर्षों तक दिखाई देगा।

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