बागेश्वर :  जिलाधिकारी आशीष भटगांई की अध्यक्षता में गुरुवार को वनाग्नि घटनाओं की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर बैठक हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया और वनाग्नि सत्र में की जाने वाली कार्रवाई पर चर्चा की गई।
जिलाधिकारी ने वनाग्नि सत्र में संबंधित विभागों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए वनाग्नि के प्रभावी रोकथाम और नियंत्रण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने वनाग्नि सत्र के दौरान सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए पुलिस विभाग के सूचना तंत्र का उपयोग करने पर भी बल दिया। साथ ही जिलाधिकारी ने जिला आपदा परिचालन केंद्र को वन विभाग के मास्टर कंट्रोल रूम से जोड़ने के भी निर्देश दिए,ताकि वनाग्नि को लेकर त्वरित और सक्रिय रूप से सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सके। जिलाधिकारी ने जनपद में गठित समुदाय आधारित संगठनों जैसे महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों,वन पंचायतों,एनसीसी,एनएसएस और स्वयंसेवी संस्थाओं का चिन्हीकरण कर व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार के माध्यम से वनाग्नि नियंत्रण हेतु समुचित सहयोग प्राप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। 
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों के बचे अवशेष (ओण, आड़ा, केड़ा) जलाने की परंपरा को समयबद्ध और व्यवस्थित करते हुए मार्च तक जलाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि यदि शरारती तत्व जानबूझकर या रंजिश में वनों में आग लगाते हैं, तो उन्हें चिन्हित कर उनके विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई करें। जिलाधिकारी ने चीड़ बाहुल्य वन क्षेत्रों में पिरूल एकत्र कर ब्रिकेट्स यूनिट की स्थापना के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में तीनों विकास खंडों के दो-दो जगह पर यूनिट स्थापना के लिए स्वयं सहायता समूहों के चिन्हीकरण करने के निर्देश दिए,ताकि उनसे सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर पिरूल के ब्रेकेट्स बनाकर उचित निस्तारण के लिए भेजा जा सके। ताकि समूहों को आत्मनिर्भर बनाकर वनाग्नि नियंत्रण में उनकी भूमिका सुनिश्चित की जा सके। बैठक में डीएफओ ध्रुव सिंह मर्तोलिया,सीडीओ आरसी तिवारी,एसडीएम अनुराग आर्या,जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल,एआरटीओ हरीश रावल, ईई पीडब्ल्यूडी संजय सिंह पांडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। 
 

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