देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साल ख़त्म होने से पहले एक और धाकड़ फैसला लिया है मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर शासन ने मूल निवास प्रमाणपत्र धारक को स्थाई निवास प्रस्तुत करने की बाध्यता को समाप्त कर दिया है। इससे मूल निवास प्रमाणपत्र धारक को अलग से स्थाई निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करना होगा। मुख्यमंत्री धामी ने जन भावनाओं के अनुरूप बड़ा निर्णय लेते हुए पहाड़ वासियों के प्रति अपना मंतव्य स्पष्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री धामी के इस निर्णय का प्रदेश के राज्य आंदोलनकारी मंच,विभिन्न सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं ने स्वागत किया है। 
राज्य आंदोलनक़ारी मंच कें प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने मूल निवास को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार कें मूल निवास के इस पहले कदम से राहत देने का कार्य किया है। अब मुख्यमंत्री से उम्मीद हैं कि वह जल्द ही मूल निवास के मुद्दे पर हमारे बच्चों कें लिए भी मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने संबंधी स्थाई समाधान निकालकर बड़ी  घोषणा करेंगे।
किसान मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं अन्ना हज़ारे टीम के प्रदेश संयोजक भोपाल सिंह चौधरी ने मुख्यमंत्री धामी के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य गठन के समय मूल निवास और स्थाई निवास का हल हो जाना चाहिए था लेकिन आज दो दशक बाद मुख्यमंत्री धामी ने इस दिशा में ठोस कदम उठाया है।
श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति, गंगोत्री धाम के अध्यक्ष, रावल हरीश सेमवाल के कहा कि उत्तराखंड सरकार ने मूल निवास को लेकर आज जो फैसला लिया है, वह ऐतिहासिक है। यह फैसला उत्तराखंड वासियों की भावना के अनुरूप और हितों को लेकर महत्वपूर्ण साबित होगा। इस फैसले का लाभ उत्तराखंड के मूल निवासियों को मिलेगा। इस फैसले से उत्तराखण्डियत की मूल भावना को बल मिलेगा।

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