ज्योतिर्मठ । विश्व धरोहर नंदा देवी नेशनल पार्क की जैव विविधता और इसके संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के रहस्यों को खंगालने के लिए ‘नंदा देवी नेशनल पार्क जैव विविधता अनुश्रवण अभियान 2026 का बिगुल बज चुका है। हर एक दशक के अंतराल पर होने वाला यह महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मिशन इस वर्ष रवाना होने जा रहा है, जिसकी तैयारियों ने अब गति पकड़ ली है। इससे पूर्व वर्ष 2015 में इस दल ने नंदा देवी के दुर्गम भीतरी क्षेत्रों का सफलतापूर्वक अध्ययन किया था।

वन विभाग की वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि इस 12-दिवसीय चुनौतीपूर्ण अभियान की सफलता के लिए दल के सदस्यों को विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल औली स्थित आईटीबीपी के पर्वतारोहण एवं स्कीइंग संस्थान में कठोर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों की विषम परिस्थितियों, हाड़ कपा देने वाली ठंड और दुर्गम चढ़ाइयों के बीच खुद को सुरक्षित रखते हुए वैज्ञानिक कार्यों को अंजाम देने के लिए दल को ‘सर्वाइवल स्किल’ और पर्वतारोहण की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसमें शामिल विशेषज्ञों का साझा अनुभव है। अभियान दल में आईटीबीपी (ITBP), एसडीआरएफ (SDRF) के जांबाजों के साथ भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI), जी.बी. पंत संस्थान (कोसी-कटारमल) और वन विभाग के वैज्ञानिक कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। आईटीबीपी के कुशल मार्गदर्शन में चल रही यह ट्रेनिंग टीम को शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बना रही है।

यह दल हिमालय के कोर जोन (भीतरी क्षेत्रों) में जाकर बदलती जलवायु के बीच दुर्लभ वनस्पतियों, लुप्तप्राय वन्यजीवों और पारिस्थितिक तंत्र में आए बदलावों का वैज्ञानिक डेटा जुटाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में 10 साल बाद होने वाला यह सर्वेक्षण न केवल हिमालयी संपदा के संरक्षण में मददगार होगा, बल्कि भविष्य की आपदा प्रबंधन नीतियों और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक निर्णायक मील का पत्थर साबित होगा।

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