कालागढ । उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार 7 अप्रैल को कालागढ़ का दौरा करेंगे। उनके दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। गुरुवार को बिजनौर की जिला अधिकारी जसजीत कौर ने भिक्कावाला के सेंट मेरी इंटरमीडिएट कॉलेज में बनाए जा रहे हेलीपैड का निरीक्षण किया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। प्रशासनिक अमला मुख्य सचिव के आगमन को लेकर सतर्क है, लेकिन इस दौरे के साथ ही कालागढ़ में बसे सैकड़ों परिवारों के भविष्य पर भी तलवार लटक गई है।

“सैकड़ों परिवारों को बेघर करने की तैयारी, वन विभाग के सख्त रुख से गहराया संकट”

कालागढ़ में वर्षों से रह रहे कई परिवारों को जिला प्रशासन अतिक्रमणकारी घोषित कर चुका है। प्रशासन का कहना है कि इन लोगों को हटाकर जमीन वन विभाग को सौंपी जाएगी, लेकिन यह सवाल उठता है कि जिन लोगों ने यहां अपना जीवन बसा लिया, उनके लिए सरकार की क्या योजना है?
वन विभाग का रुख बेहद सख्त है। वह चाहता है कि इन परिवारों को जल्द से जल्द हटाया जाए, चाहे इसके लिए उनके घरों पर बुलडोज़र ही क्यों न चलाना पड़े। लेकिन क्या इन परिवारों को उजाड़ने से पहले सरकार ने उनके पुनर्वास के बारे में सोचा? यह सवाल आज भी अनुत्तरित है। प्रशासन की ओर से बेदखली की योजना बना ली गई है, लेकिन विस्थापित होने जा रहे लोगों के लिए कोई ठोस पुनर्वास योजना अब तक सामने नहीं आई है।

“कालागढ़ में गूंज रही न्याय की पुकार, सामाजिक संगठन ने उठाई आवाज”

कालागढ़ कल्याण एवं उत्थान समिति नामक सामाजिक संगठन ने इन परिवारों के पक्ष में आवाज उठाई है। संगठन ने इस मामले को हाईकोर्ट तक पहुंचाया, जहां पुनर्वास की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है। इन परिवारों के लिए यह सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व को बचाने की जंग है। इन परिवारों में कई बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे हैं, जो हर रोज इस डर में जी रहे हैं कि कब उनका घर उजाड़ दिया जाएगा। उनका कहना है कि वे यहां सालों से रह रहे हैं, उनकी पीढ़ियां यहां पली-बढ़ी हैं। अब अचानक उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर बेघर कर देना क्या न्यायसंगत है?

“मुख्य सचिव के दौरे से उम्मीदें, लेकिन समाधान का इंतजार”

मुख्य सचिव का दौरा इस मामले में अहम साबित हो सकता है। बैठक में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अधिकारी शामिल होंगे और रामगंगा बांध परियोजना के साथ पुनर्वास का मुद्दा भी उठ सकता है। सवाल यह है कि क्या सरकार इन परिवारों की पीड़ा को समझेगी, या फिर वन विभाग की जिद के आगे गरीबों की आवाज दब जाएगी?
कालागढ़ के ये लोग किसी भी हालत में अपना आशियाना छोड़ना नहीं चाहते। अगर प्रशासन इन्हें जबरन हटाने की कोशिश करता है, तो विरोध तेज हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि 7 अप्रैल को होने वाली बैठक में इन बेघर होते परिवारों के लिए क्या समाधान निकलता है, या फिर सरकारी तंत्र की बेरुखी का एक और उदाहरण सामने आएगा।

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