वाराणसी : ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष की एक और जीत हो गई है। वाराणसी की जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार दे दिया है। साथ ही अदालत ने प्रशासन को सात दिन के अंदर बैरीकेडिंग की व्यवस्था करने का आदेश दिया है। व्यास तहखाना मस्जिद के नीचे स्थित है। इसी में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां मिली हैं। एएसआई सर्वे में इसमें कई अहम हिंदू मंदिर होने के सबूत मिले हैं। ज्ञानवापी केस में बड़ा फैसला सामने आया है। हिंदू पक्ष में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। फैसले के मुताबिक, ज्ञानवापी तहखाने में हिंदुओ को पूजा का अधिकार मिल गया है। वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि, जो जस्टिस केएम पांडे ने राम मंदिर का ताला खुलवाने का ऑर्डर दिया था। यह वैसा ही आदेश है। यह टर्निंग पॉइंट है, बहुत ऐतिहासिक ऑर्डर है।

बता दें कि एक दिन पहले वादी शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चर्तुवेदी और दीपक सिंह ने कोर्ट में दलील पेश की। कहा कि उनकी तरफ से दिए गए आवेदन के एक भाग को अदालत ने पहले ही स्वीकार कर लिया है। इसके तहत व्यासजी के तहखाने को जिलाधिकारी की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। इसी के साथ उन्होनें कहा कि हमारा दूसरा अनुरोध है कि जौ बैरिकेडिंग नंदीजी के सामने की गई है, उसे खोलने की अनुमति दी जाए।

वहीं व्यासी के तहखाने में साल 1993 के पहले जैसे पूजा के लिए अदालत के आदेश से आने-जाने दिया जाए। इस पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से अधिवक्ता मुमताज अहमद और एखलाक अहमद ने आपत्ति जताई है। उन्होनें कहा कि व्यासजी का तहखाना मस्जिद का हिस्सा है। वहां, पूजा की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह मुकदमा पूजा स्थल अधिनियम से बाधित है। तहखाना मस्जिद का हिस्सा है और वह वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। लिहाजा, वहां पूजा-पाठ कि अनुमति न दी जाए। हालांकि अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद बुधवार को अपना फैसला सुना दिया है।

 

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