रुड़की : श्री भवानी शंकर आश्रम में चल रहे   गुरु गीता प्रवचन कार्यक्रम के दूसरे दिन गुरु गीता का महत्व समझाया गया। आज के प्रवचन में विशेष रूप से यह संदेश दिया गया कि “जब तक परमात्मा के प्रति हमारी प्रीत नहीं होगी, हमें परमात्मा में आस्था और विश्वास नहीं होंगे।” इस संदर्भ में यह बताया गया कि कैसे कई भक्तों ने अपने जीवन को परमात्मा को अर्पित कर दिया और गुरु के बताए मार्ग पर चलकर भक्ति में उच्च स्थान प्राप्त किया।गुरु केवल शरीर नहीं होते, बल्कि वे परमात्मा का माध्यम होते हैं जो मानव कल्याण हेतु धरती पर अवतरित होते हैं। प्रवचन में यह भी बताया गया कि गुरु के ज्ञान के प्रति समर्पित होकर और उसे समझकर ही शिष्य का कल्याण संभव होता है। गुरु गीता यही उपदेश देती है कि गुरु के प्रति कैसा भाव होना चाहिए, कैसी श्रद्धा होनी चाहिए, और गुरु के माध्यम से कैसे हमारा कल्याण होता है। इस आयोजन में कथा व्यास के रूप में परम पूज्यपाद श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी मैत्रेयी गिरी जी महाराज और परम पूज्यपाद श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. हेमानंद सरस्वती जी महाराज उपस्थित है। यह आयोजन श्री महन्त रीमा गिरी जी और श्री महन्त त्रिवेणी गिरी जी के पर्यवेक्षण में हो रहा है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *