कोटद्वार । राजकीय इण्टर कालेज धोबीघाट के शिक्षक डाॅ सौरभ मिश्र ने हिन्दी दिवस के मौके पर 24वीं बार रक्तदान किया। शिक्षक सौरभ ने बताया कि आज के समय में हिन्दी भाषा सिर्फ आम बोल-चाल की भाषा तक सीमित दिखायी देती है। आज के समय में विद्यार्थियों के स्नातक, स्नातकोत्तर स्तरीय व्यावसायिक पाठ्यक्रम, सरकारी अथवा निजी संस्थानों, दफ्तरों आदि में अधिकारी, कर्मचारी स्तर पर अथवा लिखित तौर पर आवेदन करने का भाषा संचार माध्यम से हिन्दी के अस्तित्व में कमी आयी है।
डाॅ मिश्र ने अपने जीवन में ऐसे भी व्यक्ति देखे हैं जिनको पहली प्राथमिक भाषा हिन्दी उनके माता-पिता वु गुरु ने सिखायी किन्तु वे ऑफिशियली विदेशी भाषाओं की महत्ता के कारण और विदेश जाकर अपनी बेहतर आमदनी के लिए हिन्दी भाषा को भूल चुके हैं और अब दुबारा हिन्दी भाषा को सीखने का प्रयास कर रहे हैं। वे व्यक्ति ये नहीं जानते कि, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय के अनुसार विश्व में 132 देशों में जा बसे भारतीय मूल के लोग हिन्दी भाषा माध्यम से ही अपना कार्य निष्पादित करते हैं। डाॅ सौरभ मिश्र अपने 24वें रक्तदान के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि, जितना दूसरों की जिन्दगी को बचाने के लिए रक्तदान आवश्यक है इससे रक्तदाता भी स्वस्थ रहता है अतः रक्तदान करना चाहिए। उतना ही हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा ही नहीं मातृभाषा भी है यह भी हमारे जीवन का एक हिस्सा है इसका प्रचार-प्रसार ही नहीं बल्कि हिन्दी भाषा को हमारे भाषा माध्यम में प्रयोग करना चाहिए।

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