देहरादून:उत्तराखंड में प्रस्तावित नई विद्युत दरों (टैरिफ) पर शुक्रवार को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) के सुनवाई कक्ष में जनसुनवाई हुई। आयोग अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी और सदस्य विधि अनुराग शर्मा की मौजूदगी में हुई इस सुनवाई में उपभोक्ताओं, किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों ने तीनों ऊर्जा निगमों (यूपीसीएल, यूजेवीएनएल और पिटकुल) द्वारा दिए गए बढ़ोतरी के प्रस्ताव का जमकर विरोध किया।

जनसुनवाई में पहुंचे यशवीर आर्य, उम्मेद सिंह, रमेश जोशी, प्रदीप सती सहित कई प्रतिनिधियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पांच साल से अधिक समय से बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन उत्तराखंड में हर साल क्यों दाम बढ़ाए जा रहे हैं? पूर्व अधिकारी एसएम बिजल्वाण ने आरोप लगाया कि लाइन हानियां कम करने और विभागों से वसूली करने के बजाय आम उपभोक्ताओं पर बोझ डाला जा रहा है। यूकेडी की प्रतिनिधि मीनाक्षी घिल्डियाल ने स्मार्ट मीटर से स्वत: लोड बढ़ाने को ‘लूट’ करार देते हुए इसे रोकने की मांग की।

उद्योग प्रतिनिधियों ने इसे उद्योगों के लिए ‘घातक’ बताया। राजीव अग्रवाल ने कहा कि यूपीसीएल और पिटकुल चूना लगा रहे हैं, तीनों निगम पूंजीकरण का खेल खेल रहे हैं। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने बताया कि एलटी टैरिफ में उत्तराखंड यूपी और हिमाचल से आगे है, सरकारी उपक्रमों से बिल वसूली न कर उद्योगों पर बोझ बढ़ाया जा रहा है।

इससे पलायन बढ़ रहा है। पवन अग्रवाल ने मांग की कि टैरिफ यूपी से 1.5-2 रुपये सस्ता होना चाहिए, तभी उद्योग आएंगे। उन्होंने सरकार द्वारा 30 पैसे सेस, 10 पैसे रॉयल्टी और 60 पैसे वाटर टैक्स के नाम पर लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क से समायोजन की बात कही। डॉ. हरेंद्र गर्ग ने चेतावनी दी कि राज्य में 76 प्रतिशत उद्योग थर्ड पार्टी जॉब वर्क करते हैं, जहां मेहनताना 20 साल पहले जितना था आज भी वही है, लेकिन बिजली दामों में भारी उछाल आ चुका है। बढ़ोतरी से आठ लाख से अधिक कर्मचारी बेरोजगारी के खतरे में पड़ जाएंगे।

स्मार्ट मीटर को लेकर भी उपभोक्ता नाराज दिखे। कईयों ने कहा कि मीटर लगने के बाद बिल दोगुना हो गया है। यूपीसीएल ने स्पष्ट किया कि यदि गड़बड़ी है तो बताएं, चेक मीटर लगाया जाएगा और सुझाव भी मांगे। यूपीसीएल ने दावा किया कि यूपी में राज्य सरकार सब्सिडी देती है, इसलिए दरें स्थिर हैं, लेकिन उत्तराखंड में ऐसा प्रावधान नहीं है, इसलिए बढ़ोतरी जरूरी है। यह जनसुनवाई पहली बार इतनी भीड़ वाली रही, जिसमें उपभोक्ताओं की संख्या काफी अधिक थी। तीनों निगमों ने कुल मिलाकर औसतन 18.50 प्रतिशत (यूपीसीएल ने 16.23 प्रतिशत सहित) की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है, जो अप्रैल 2026 से लागू हो सकती है। आयोग अब सभी आपत्तियों पर विचार कर अंतिम फैसला लेगा।

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