ज्योतिर्मठ। सीमांत क्षेत्र ज्योतिर्मठ में भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने की परंपरा से पूर्व, हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी नरसिंह नवदुर्गा सेवा समिति के तत्वावधान में ऐतिहासिक गांधी मैदान में भव्य रामलीला महायज्ञ का शुभारंभ हो गया है। रामलीला के प्रथम दिन का मुख्य आकर्षण राम जन्म और रावण के अहंकार का सजीव चित्रण रहा, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। कार्यक्रम की शुरुआत नरसिंह मंदिर वार्ड के कोर्स की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण और गणेश वंदना के साथ हुई, जिसके बाद विधिवत रूप से रामलीला का श्रीगणेश किया गया।

रामलीला के प्रथम सोपान में रावण, कुंभकरण और विभीषण द्वारा ब्रह्मा जी से अजय-अमर रहने का वरदान मांगने का दृश्य अत्यंत दिव्य और अलौकिक रहा। इसके पश्चात अहंकारी रावण द्वारा कैलाश पर्वत को उठाकर लंका ले जाने के प्रयास के मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला के इस महायज्ञ में प्रभु श्री राम के जन्म को बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जैसे ही मंच पर ‘भय प्रगट कृपाला, दीन दयाला’ की गूंज और सखियों के मधुर गीतों के बीच राम जन्मोत्सव शुरू हुआ, पूरा गांधी मैदान जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा। लीला के दूसरे दिन ताड़िका वध और सुबाहु-मारीच के वध का दृश्य दिखाया गया, जिसमें ऋषि विश्वामित्र के साथ वन गमन और असुरों के संहार का जीवंत मंचन किया गया।

इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में नगरपालिका जोशीमठ की अध्यक्ष श्रीमती देवेश्वरी शाह और विभिन्न नौ वार्डों के सभासद उपस्थित रहे। रामलीला के सफल संचालन में नरसिंह नवदुर्गा सेवा समिति के अध्यक्ष भुवन चंद्र उनियाल, उपाध्यक्ष महिमानंद उनियाल, कोषाध्यक्ष शशांक सेमवाल, सचिव जयदीप मंद्रवाल, संतोष सती और अजय रतूड़ी की सक्रिय भूमिका रही। साथ ही स्वागत समिति के सदस्य प्रकाश कपरुंवाण, उमेश चंद्र सती, दीपक शाह सहित क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व होने वाली यह रामलीला क्षेत्र की प्राचीन परंपरा और संस्कृति का अटूट हिस्सा है।

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