तुंगनाथ : विश्व के सबसे ऊंचाई पर स्थित शिवालय और पंचकेदारों में प्रतिष्ठित तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ जी के कपाट आज बुधवार को ग्रीष्मकाल के लिए विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आज प्रातः काल चोपता से भगवान की चल-विग्रह डोली ने धाम के लिए प्रस्थान किया, जिसके बाद दोपहर 11:00 बजे शुभ मिथुन लग्न में मंदिर के मुख्य कपाट खोले गए। इस ऐतिहासिक और धार्मिक क्षण के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से आए सैकड़ों श्रद्धालु धाम में उपस्थित रहे, जिससे पूरा परिसर “हर-हर महादेव” और “बाबा तुंगनाथ” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

उल्लेखनीय है कि कपाट खुलने की यह पवित्र प्रक्रिया बीते 20 अप्रैल को शुरू हुई थी, जब बाबा की डोली ने अपने शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ (मर्कटेश्वर मंदिर) से प्रस्थान कर रात्रि प्रवास भूतनाथ मंदिर में किया था। इसके पश्चात 21 अप्रैल को डोली अपने दूसरे पड़ाव चोपता पहुंची। आज 22 अप्रैल को चोपता से धाम पहुँचने पर डोली का भव्य स्वागत किया गया और पारम्परिक रीति-रिवाजों के बीच मुख्य पुजारी द्वारा मंदिर के द्वार खोले गए। कपाट खुलने के उपरान्त भगवान की विशेष पूजा-अर्चना सम्पन्न की गई और लोक कल्याण की कामना की गई। अब आगामी छह माह तक भक्त भगवान तुंगनाथ के दर्शन इसी धाम में कर सकेंगे। प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा यात्रा के सफल संचालन हेतु सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की गई हैं।

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