उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा अपनी पूरी रफ्तार पर है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा केदार, बद्रीविशाल, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन इस बीच, परिवहन विभाग के एक नियम को लेकर स्थानीय टैक्सी ऑपरेटरों और कमर्शियल वाहन चालकों में असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
नियमों के मुताबिक, चार धाम के पहाड़ी और संकरे रास्तों पर कमर्शियल वाहन (टैक्सी-मैक्सी, बस आदि) चलाने वाले ड्राइवरों के पास ‘हिल एंडोर्समेंट’ (पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी चलाने का विशेष लाइसेंस) होना अनिवार्य है। इसके बिना ग्रीन कार्ड और ट्रिप कार्ड जारी नहीं किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब या उत्तर प्रदेश जैसे मैदानी राज्यों से आने वाले प्राइवेट (व्यक्तिगत) वाहन चालकों के लिए उत्तराखंड में ऐसी कोई बंदिश नहीं है।
क्या है नियम और क्यों हो रहा है विरोध?
उत्तराखंड परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार, पहाड़ी रूटों पर यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। मैदानी इलाकों और पहाड़ों पर ड्राइविंग के अनुभव में जमीन-आसमान का अंतर होता है। इसी सुरक्षा को देखते हुए कमर्शियल ड्राइवरों के लिए हिल एंडोर्समेंट अनिवार्य किया गया है।
कमर्शियल चालकों का तर्क: “हमें सालों का पहाड़ी रास्तों का अनुभव है, फिर भी हमारे लिए नियम इतने सख्त हैं। इसके विपरीत, दिल्ली-एनसीआर या अन्य राज्यों के मैदानों से आने वाले लोग, जिन्हें पहाड़ों पर गाड़ी बैक करने या मोड़ने का अनुभव नहीं होता, वे बिना किसी रोक-टोक के अपनी प्राइवेट गाड़ियों से सीधे बद्रीनाथ-केदारनाथ पहुंच रहे हैं। दुर्घटनाओं का खतरा इनसे ज्यादा रहता है।”दोनों के लिए अलग-अलग मापदंड क्यों मोटर वाहन अधिनियम के तहत: कमर्शियल वाहनों पर सार्वजनिक सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है क्योंकि वे यात्रियों से किराया वसूलते हैं। इसलिए उनके फिटनेस, परमिट और ड्राइवर की योग्यता (हिल एंडोर्समेंट) की बारीकी से जांच की जाती है।
सुरक्षा को लेकर उठ रहे हैं सवाल
गिरीश भाटिया टैक्सी मैक्सी यूनियन अध्यक्ष हरिद्वार का कहना है कि पहाड़ों पर होने वाले कई हादसों में वे कमर्शियल गाड़ियां नहीं होतीं जो रोज वहां चलती हैं, बल्कि वे प्राइवेट गाड़ियां होती हैं जिनके चालक पहाड़ों के ‘ब्लाइंड टर्न’ और चढ़ाई-उतराई के नियमों से अनजान होते हैं। सोशल मीडिया पर भी अक्सर ऐसे वीडियो सामने आते हैं जहाँ मैदानी राज्यों की गाड़ियां संकरे रास्तों पर जाम या हादसे का कारण बनती हैं।
