उत्तराखंड शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन: निजी स्कूलों की व्यावसायिक मनमानी के खिलाफ जारी हुए कड़े निर्देश, हेल्पलाइन नंबर जारी
देहरादून। उत्तराखंड में निजी स्कूलों (Private Schools) द्वारा अभिभावकों के आर्थिक शोषण और मनमानी पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा निदेशालय और शासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए आधिकारिक आदेशों (पत्रावली संख्या: 82/9(2)/2026/214) के मुताबिक, प्रदेश के सभी 13 जिलों में स्कूलों की व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों (DM) और मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEO) को सौंपी गई है।
​यदि कोई भी मान्यता प्राप्त निजी स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
​ दोबारा एडमिशन फीस पर पूरी तरह प्रतिबंध: शासनादेश संख्या 586/XXIV-3/17/01 (11) 2007 के तहत, यदि कोई छात्र एक ही स्कूल में अगली कक्षा में प्रमोट हो रहा है, तो स्कूल उससे दोबारा प्रवेश शुल्क (Re-admission Fee) या कॉशन मनी नहीं वसूल सकता। ऐसा करना पूरी तरह गैरकानूनी है।
​मनपसंद दुकान से किताबें-यूनिफॉर्म खरीदने की आजादी: माननीय उच्च न्यायालय और सरकारी आदेशों के अनुसार, कोई भी स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को किसी विशेष प्रकाशक या चुनिंदा बुक-सेलर से ही सामग्री खरीदने के लिए विवश नहीं कर सकता। छात्र चाहें तो पुरानी किताबों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
​अधिकारियों की सीधी जवाबदेही: राज्य के सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEO) को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे अपने क्षेत्रों में इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाएं।
नियमों का उल्लंघन होने पर कैसे और कहां करें शिकायत?
​यदि कोई स्कूल प्रबंधन इन नियमों को दरकिनार कर अभिभावकों पर दबाव बनाता है, तो पीड़ित इन तीन चरणों में अपनी आवाज उठा सकते हैं:
​आधिकारिक टोल-फ्री हेल्पलाइन: शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों की मनमानी की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए एक समर्पित टोल-फ्री नंबर 18001804275 चालू किया है। अभिभावक इस पर सीधे शिकायत कर सकते हैं।
​DM या CEO को लिखित शिकायत: अभिभावक अपने जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी या जिलाधिकारी को लिखित रूप में शिकायत पत्र सौंप सकते हैं। ध्यान रहे, शिकायत दर्ज कराते समय कार्यालय से पावती (Receiving) या मोहर लगी कॉपी जरूर अपने पास सुरक्षित रखें।
​महानिदेशक स्तर पर कार्रवाई: यदि जिला स्तर पर शिकायत के बाद भी 30 दिनों के भीतर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तो अभिभावक अपनी शिकायत की रिसीविंग कॉपी के साथ सीधे महानिदेशक/निदेशक (माध्यमिक शिक्षा), उत्तराखंड, देहरादून को मामला भेज सकते हैं।
​ शिक्षा विभाग के इस कड़े कदम से उत्तराखंड के लाखों अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस महत्वपूर्ण जानकारी को अधिक से अधिक साझा करें ताकि कोई भी स्कूल प्रबंधन आपकी अज्ञानता का फायदा न उठा सके।

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