उत्तरकाशी। ग्राम सभा झाला की आयोजित बैठक में ग्रामीणों की व्यापक भागीदारी के बीच पर्यावरण संरक्षण और ऐतिहासिक विरासत को बचाने की दिशा में दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से “ग्राम झाला ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम नीति 2020” के बायलॉज पारित करते हुए गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लिया। वहीं झाला की ऐतिहासिक धरोहर पंचपुरा वीर सिंह भवन के संरक्षण के लिए भी ग्रामीणों ने सामूहिक प्रस्ताव पारित किया। ग्रामीणों ने कहा कि गांव की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं, बल्कि प्रत्येक ग्रामीण की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

कचरे के स्रोत पर पृथक्करण और उचित निस्तारण पर जोर

ग्राम सभा में पारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था के तहत गांव में कचरे को स्रोत पर ही अलग करने, उसके नियमित संग्रहण और उचित निस्तारण को बढ़ावा दिया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों, नालियों और प्राकृतिक जलस्रोतों में कचरा फेंकने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने का निर्णय लिया गया। ग्राम सभा ने स्पष्ट संदेश दिया कि स्वच्छता केवल ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक ग्रामवासी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों की भागीदारी से तैयार और पारित व्यवस्था को गांव में प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया, ताकि झाला को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त गांव के रूप में विकसित किया जा सके।

पांच मंजिला ऐतिहासिक भवन को बचाने का सामूहिक संकल्प

बैठक में पर्यावरण के साथ-साथ गांव की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर भी गंभीरता दिखाई गई। ग्राम सभा ने झाला स्थित पंचपुरा वीर सिंह भवन को संरक्षित करने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। विशिष्ट पांच मंजिला वास्तुकला के लिए पहचाने जाने वाले इस ऐतिहासिक भवन का स्थानीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। ग्रामीणों ने इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का संकल्प लिया। ग्राम सभा का कहना है कि विकास का मतलब केवल नई इमारतों का निर्माण नहीं, बल्कि पुरानी धरोहर, इतिहास, संस्कृति और स्थानीय पहचान को संरक्षित करना भी है।

प्रकृति और विरासत दोनों की जिम्मेदारी ग्रामीणों की

ग्राम सभा झाला में लिए गए दोनों निर्णय जनभागीदारी की भावना को मजबूत करने वाले माने जा रहे हैं। एक तरफ प्लास्टिक और कचरे की समस्या से निपटने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया गया है, तो दूसरी ओर ऐतिहासिक भवन के संरक्षण की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से उठाने की पहल की गई है।

ग्राम पंचायत इन दोनों संकल्पों को धरातल पर उतारने के लिए ग्रामीणों, युवाओं, महिला मंगल दलों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से अभियान चलाएगी। ग्रामीणों का मानना है कि जब गांव अपने विकास और संरक्षण से जुड़े निर्णय स्वयं लेता है तो वह महज प्रशासनिक आदेश नहीं रहता, बल्कि जनसंकल्प बन जाता है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित होगी पहचान

ग्राम सभा के इन फैसलों से झाला को स्वच्छ, सुंदर और प्लास्टिक मुक्त बनाने के साथ-साथ उसकी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में नई पहल शुरू हुई है। ग्रामीणों ने प्रकृति और विरासत दोनों के संरक्षण को गांव के भविष्य से जोड़ते हुए इसे सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

प्रकृति भी हमारी, विरासत भी हमारी – संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमारी

ग्राम सभा झाला का यह संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत छोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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