• पूर्व सैनिक राजबल्लभ पुरोहित पहुंचे वेदनी बुग्याल
  • बोले मां का बुलावा हो तो उम्र आड़े नहीं आती

गोपेश्वर (चमोली)। उम्र 76 साल, लेकिन कदमों में वही हौसला और दिल में मां नंदा के प्रति वही अटूट आस्था। बड़ी जात यात्रा में शामिल होने के लिए पूर्व सैनिक राजबल्लभ पुरोहित इस उम्र में भी कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर वेदनी बुग्याल पहुंचे। ऊंचाई पर पहुंचकर उन्होंने मां नंदा के दर्शन किए तो चेहरे पर थकान से ज्यादा आस्था की चमक नजर आई।

पूर्व सैनिक राजबल्लभ पुरोहित का वेदनी पहुंचना बड़ी जात में शामिल होना श्रद्धालुओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उम्र के इस पड़ाव पर जहां पहाड़ की कठिन चढ़ाई किसी चुनौती से कम नहीं, वहीं मां नंदा के प्रति उनकी श्रद्धा ने उन्हें इस यात्रा में शामिल होने का हौसला दिया।

बड़ी जात यात्रा में देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु मां नंदा के मायके से कैलाश की ओर बढ़ रहे हैं। इसी आस्था की कड़ी में राजबल्लभ पुरोहित भी वेदनी बुग्याल पहुंचे। उनका कहना है कि मां नंदा के प्रति आस्था उम्र की मोहताज नहीं होती। मां का बुलावा हो तो कठिन रास्ते भी आसान लगने लगते हैं।

वेदनी बुग्याल में 76 वर्षीय पूर्व सैनिक की मौजूदगी ने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के बीच यह संदेश भी दिया कि आस्था के आगे उम्र की सीमा छोटी पड़ जाती है। मां नंदा की बड़ी जात केवल पैदल यात्रा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही उस आस्था की यात्रा है, जिसमें हर उम्र के श्रद्धालु अपनी ध्याणी मां को विदा करने के लिए कठिन पहाड़ चढ़ते हैं।

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