चंपावत : उत्तराखण्ड के पहाड़ों में प्रतिभा और नवाचार की कमी नहीं है। यहां के युवा सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी तकनीकी सोच और मेहनत से नई मिसाल पेश कर रहे हैं। अल्मोड़ा के एक युवा के फ्लाइंग कार बनाने के प्रयोग के बाद अब चंपावत के राहुल नरियाल अपनी सोलर कार को लेकर चर्चा में हैं। महज 40 हजार रुपये की लागत और करीब एक महीने की मेहनत से राहुल ने ऐसा इलेक्ट्रिक वाहन तैयार किया है, जिसे चलाने के लिए वह मुख्य रूप से सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने का दावा करते हैं।

चंपावत के मादली निवासी 20 वर्षीय राहुल फिलहाल चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और भविष्य में वैकल्पिक ऊर्जा की जरूरत को देखते हुए उनके मन में ऐसा वाहन बनाने का विचार आया, जो पारंपरिक ईंधन पर निर्भर न रहे। इसी सोच को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने अपने स्तर पर प्रयोग शुरू किया और करीब एक महीने में सोलर कार का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया।

 

अपनी बचत से जुटाए पैसे, खुद तैयार किया प्रोटोटाइप

राहुल ने इस प्रोजेक्ट पर लगभग 40 हजार रुपये खर्च किए। इसके लिए उन्होंने अपने निजी खर्च के लिए मिलने वाली रकम में से पैसे बचाए और वाहन के निर्माण में जरूरी उपकरण खरीदे। कार में सोलर पैनल, बैटरी और अन्य आवश्यक इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल उपकरण लगाए गए हैं।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के कारण राहुल को बैटरी और ऊर्जा प्रणाली को समझने में मदद मिली, हालांकि वाहन के मैकेनिकल हिस्सों को तैयार करना उनके लिए आसान नहीं था। कई चुनौतियों के बावजूद उन्होंने लगातार प्रयास जारी रखे और अपने विचार को एक चलने वाले प्रोटोटाइप का रूप दिया।

 

एक बैटरी से 75 किमी चलने का दावा

राहुल के मुताबिक, उनकी बनाई कार की अधिकतम रफ्तार लगभग 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा है। वह एक बैटरी से करीब 75 किलोमीटर तक सफर करने का दावा करते हैं। वाहन में दो बैटरियां लगाई गई हैं, जिनके इस्तेमाल से कुल दूरी लगभग 150 किलोमीटर तक पहुंचने की बात कही गई है।

हालांकि, वास्तविक रेंज और अधिकतम गति की स्वतंत्र तकनीकी जांच की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन आंकड़ों को फिलहाल राहुल के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

 

धूप न हो तो बिजली से चार्ज होगी बैटरी

पहाड़ी इलाकों में मौसम का बदलना आम बात है। कभी लगातार बादल छाए रहते हैं तो कभी कई दिनों तक पर्याप्त धूप नहीं मिलती। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए राहुल ने अपनी कार में बैटरी को सामान्य बिजली से चार्ज करने की सुविधा भी रखी है।

इस व्यवस्था से वाहन को केवल धूप पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। पर्याप्त सौर ऊर्जा उपलब्ध न होने की स्थिति में बैटरी को बिजली से चार्ज करके इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह राहुल ने अपने प्रयोग में सौर ऊर्जा के साथ वैकल्पिक चार्जिंग व्यवस्था को भी शामिल किया है।

 

शुरुआत में नहीं मिला साथ, अब मेहनत की हो रही सराहना

राहुल का कहना है कि जब उन्होंने सोलर कार बनाने का विचार साझा किया, तब कॉलेज के कुछ छात्रों और परिवार के लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था। शुरुआती दिनों में उन्हें परिवार की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपने विचार पर काम करना नहीं छोड़ा।

जब वाहन तैयार होकर सड़कों पर चलने लगा, तो लोगों की प्रतिक्रिया बदलने लगी। आज राहुल जब अपनी बनाई कार लेकर निकलते हैं, तो लोग रुककर उसे देखते हैं और उसकी तस्वीरें व वीडियो बनाते हैं। परिवार और आसपास के लोगों से भी अब उन्हें प्रोत्साहन मिल रहा है। राहुल फिलहाल इस वाहन का इस्तेमाल कॉलेज आने-जाने के लिए भी कर रहे हैं।

 

अब पांच सीटर सोलर कार बनाने की तैयारी

राहुल का मौजूदा वाहन एक प्रोटोटाइप है, जिसे उन्होंने मुख्य रूप से प्रयोग और शुरुआती परीक्षणों के लिए तैयार किया है। अब उनका लक्ष्य पांच लोगों के बैठने की क्षमता वाली सोलर कार बनाना है। हालांकि, बड़े वाहन के निर्माण के लिए अधिक धन, बेहतर तकनीकी संसाधनों और विशेषज्ञों के सहयोग की जरूरत होगी।

राहुल को उम्मीद है कि कॉलेज, किसी संस्था या अन्य माध्यम से आर्थिक और तकनीकी सहायता मिलती है, तो वह अपने इस विचार को आगे बढ़ा सकेंगे।

राहुल नरियाल की यह पहल बताती है कि बड़े बदलाव की शुरुआत हमेशा बड़े संसाधनों से नहीं होती। कभी-कभी एक विचार, थोड़ी-सी बचत और लगातार मेहनत भी नई संभावनाओं के दरवाजे खोल सकती है। अब देखना होगा कि उनका यह शुरुआती प्रयोग भविष्य में किस तरह विकसित होता है और पांच सीटर सोलर कार बनाने का सपना कब आकार लेता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *