• कर्णप्रयाग अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट का पद 10 महीने से खाली
  • रक्त की व्यवस्था के लिए भटकते रहे परिजन

गोपेश्वर (चमोली)। हीमोग्लोबिन का स्तर 5.6 तक पहुंचने पर जिंदगी की जंग लड़ रही 28 वर्षीय महिला की मदद के लिए गोपेश्वर के दो युवा रक्तदाता आगे आए। कर्णप्रयाग अस्पताल में भर्ती महिला के लिए स्थानीय स्तर पर रक्त की व्यवस्था नहीं हो पाई तो परिजनों को करीब 40 किलोमीटर दूर गोपेश्वर का रुख करना पड़ा। अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट का पद पिछले 10 महीने से खाली होने की जानकारी के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।

किमोली के पारतोली गांव निवासी सोनम पुंडीर पत्नी सतेंद्र पुंडीर को मंगलवार को कर्णप्रयाग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उनका हीमोग्लोबिन स्तर 5.6 पाया गया। पत्नी को रक्त की जरूरत पड़ने पर सतेंद्र पुंडीर ने रक्तदाताओं से संपर्क किया, लेकिन रक्त की व्यवस्था करने में दिक्कत आई। इसके बाद उन्होंने अपने छोटे भाई नवीन को करीब 40 किलोमीटर दूर गोपेश्वर भेजा।

गोपेश्वर में मोहित बिष्ट और प्रदीप भंडारी ने एबी पॉजिटिव रक्तदान कर महिला की मदद की, वहीं अरविंद पुंडीर ने भी अपने स्तर से एक युवक को भेजकर सहयोग किया। मुश्किल समय में युवाओं की इस पहल से महिला के परिजनों को राहत मिली। भारतीय रेडक्रॉस शाखा चमोली के सचिव सुरेंद्र रावत और शंकर बिष्ट ने रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र देकर उनका आभार जताया।

10 महीने से पैथोलॉजिस्ट नहीं

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराग ने बताया कि पिछले 10 महीने से पैथोलॉजिस्ट नहीं है। विशेषज्ञ की अनुपलब्धता के बीच रक्त संबंधी जांच और अन्य जरूरी चिकित्सा प्रक्रियाओं को लेकर अस्पतालों में चुनौतियां सामने आ सकती हैं। हालांकि, रक्त चढ़ाने से पहले रक्त समूह की पुष्टि और क्रॉस-मैचिंग जैसी जरूरी जांच निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाना आवश्यक है।

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

सीमांत जनपद में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। सवाल यह है कि आपात स्थिति में मरीजों को समय पर जांच, रक्त और उपचार उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं है। रक्तदान के लिए युवाओं की पहल ने मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में मरीजों को दूर-दराज से मदद जुटाने के लिए मजबूर होना स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

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