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हरिद्वार आगामी अर्धकुंभ मेले को लेकर हरिद्वार में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार का कार्य तीव्र गति से जारी है, परंतु गंगनहर पर हो रहे नए घाटों के निर्माण ने स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। गंगनहर की बायीं पटरी पर लगभग तीन किलोमीटर के दायरे में चल रहे इस निर्माण कार्य से नहर का स्वाभाविक जल प्रवाह क्षेत्र (क्रॉस-सेक्शन) संकुचित हो रहा है।स्थानीय स्तर पर घाटों के विस्तार हेतु बनाई जा रही रिटेनिंग वॉल के कारण नहर की चौड़ाई लगभग 5 से 6 फीट तक घट रही है। जल-विज्ञान के नियमों के अनुसार, प्रवाह क्षेत्र संकरा होने से जल का वेग और स्तर दोनों बढ़ जाते हैं। ऐसे में यदि ऊपरी जलस्तर से अतिरिक्त पानी छोड़ा जाता है, तो गोविंदपुरी, नया हरिद्वार और कृष्णानगर जैसी घनी आबादी वाली कॉलोनियों में जलभराव और तटबंध टूटने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

इस निर्माण कार्य को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी विवाद उत्पन्न हो गया है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग (उत्तरी खंड, गंगनहर, रुड़की) ने स्पष्ट किया है कि गंगनहर के प्रबंधन व संचालन का अधिकार उनके पास है, लेकिन उत्तराखंड की कार्यदायी संस्था ने बिना किसी लिखित अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के यह कार्य शुरू कर दिया। इस संबंध में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने नोटिस जारी कर निर्माण से जुड़ी विस्तृत ड्राइंग, डिज़ाइन और तकनीकी रिपोर्ट तलब की है।
मुख्य बिंदुओं का तथ्यात्मक विश्लेषण
* हाइड्रोलॉजिकल (जल-विज्ञान) जोखिम:
पूर्व में मायापुर से ज्वालापुर तक गंगनहर की क्षमता बढ़ाकर लगभग 13,500 क्यूसेक की गई थी ताकि पेयजल और सिंचाई की आपूर्ति निर्बाध रहे। वर्तमान निर्माण से नहर का प्रवाह क्षेत्र घटने के कारण 14,000 क्यूसेक या उससे अधिक जल प्रवाह की स्थिति में ओवरफ्लो का जोखिम अत्यधिक बढ़ जाएगा।
अंतरराज्यीय प्रशासनिक टकराव:
वर्ष 2000 में उत्तराखंड के गठन के बाद से ही गंगनहर की परिसंपत्तियों, भूमि स्वामित्व और जल प्रबंधन को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मध्य विवाद लंबित है। बिना विधिवत सहमति और तकनीकी एनओसी के निर्माण कार्य आगे बढ़ाना दोनों राज्यों के बीच प्रशासनिक गतिरोध को गहरा कर सकता है।
जनसुरक्षा बनाम अवसंरचना विकास:
धार्मिक आयोजनों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना आवश्यक है, परंतु सुरक्षा मानकों और वैज्ञानिक हाइड्रोलिक मॉडल की अनदेखी घनी बस्तियों के लिए आपदा का कारण बन सकती है। विकास कार्यों में पर्यावरण और सुरक्षा का संतुलन अनिवार्य है।
वैकल्पिक शीर्षक विकल्प
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