देहरादून : सिद्धपीठ प्राचीन श्री शिव मंदिर, धर्मपुर चौक में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस कथा व्यास आचार्य अरुण सती जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, पूतना उद्धार, गोपी-ग्वालों की भक्ति तथा भगवान के नाम-स्मरण की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

आचार्य अरुण सती जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल मनोरंजन का विषय नहीं, बल्कि जीवन में प्रेम, भक्ति, समर्पण और धर्म का मार्ग दिखाने वाली हैं। उन्होंने भगवान के नाम की महिमा बताते हुए कहा कि श्रीकृष्ण नाम का स्मरण और संकीर्तन मनुष्य के जीवन को पवित्र करने का सरल एवं प्रभावी माध्यम है।

कथा में पूतना उद्धार प्रसंग का वर्णन करते हुए आचार्य ने बताया कि पूतना भगवान श्रीकृष्ण को विष पिलाने के उद्देश्य से उनके पास पहुंची थी, लेकिन भगवान ने उसका भी उद्धार कर दिया। यह प्रसंग बताता है कि भगवान की शरण में आने वाले जीव पर उनकी कृपा होती है। इसके बाद उन्होंने गोपी-ग्वालों के साथ श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि ब्रज की भक्ति में निष्कपट प्रेम और पूर्ण समर्पण का भाव देखने को मिलता है।

उन्होंने भागवत पुराण में वर्णित मुक्ति के मार्ग पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं से सदाचार, भक्ति, सेवा, परोपकार और ईश्वर के प्रति समर्पण को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सकारात्मक विचारों के साथ समाज और प्रकृति के प्रति भी अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण और समाज के कल्याण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

कथा के दौरान भजन, श्रीकृष्ण नाम-संकीर्तन और जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का आनंद लिया।

इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष सीताराम भट्ट, देवेंद्र अग्रवाल, दिनेश चमोली, दीपक शर्मा, मदन हुरला, आत्माराम शर्मा, जय प्रकाश बंसल, शरद शर्मा, प्रमोद शर्मा, सुनील कौशिक, सुचेत, सुरेंद्र गुप्ता, रमन गुप्ता, श्रीमती मंजू, शर्मिला, अर्चना ठाकुर, अन्नू, संगीता खन्ना, सुदेश सहित समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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