• ग्रामोत्थान परियोजना से छह लाख और बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण मिला, मनरेगा से बना पोल्ट्री शेड; पांच साल से संचालित फार्म बना ग्रामीण आजीविका का सहारा

पौड़ी। गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाकर पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन विकसित करने की कोशिशें अब धरातल पर रंग दिखा रही हैं। विकासखंड पाबौ के भराड़ी देवी स्वयं सहायता समूह ने मुर्गीपालन को स्वरोजगार का जरिया बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की पहल की है। पिछले पांच वर्षों से संचालित पोल्ट्री फार्म से जुड़ी 12 महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ व्यवसाय में योगदान देकर परिवार की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण और सामूहिक प्रयासों से खड़ा हुआ यह उद्यम गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने की संभावनाओं को सामने ला रहा है।

नौ लाख रुपये के ऋण और मनरेगा से खड़ा हुआ कारोबार

भराड़ी देवी स्वयं सहायता समूह के अध्यक्ष सुधीर रावत ने बताया कि ग्रामोत्थान परियोजना के माध्यम से पोल्ट्री फार्म शुरू किया गया था। परियोजना से छह लाख रुपये का ऋण मिला, जबकि बैंक से तीन लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध हुई। मनरेगा के सहयोग से फार्म के लिए शेड तैयार किया गया, जिससे व्यवसाय शुरू करने के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाएं जुटाने में मदद मिली।

उन्होंने कहा कि मुर्गीपालन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का अच्छा विकल्प बन सकता है। इच्छुक युवा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर इस क्षेत्र में अपनी आजीविका विकसित कर सकते हैं।

दिल्ली से गांव लौटे, मुर्गीपालन को बनाया रोजगार

समूह से जुड़े संतोष रावत ने भी गांव लौटकर स्वरोजगार अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि दिल्ली से वापस आने के बाद वह पोल्ट्री फार्म के काम से जुड़े। समूह के साथ 10 से 12 महिलाएं काम कर रही हैं और गांव में रहकर ही व्यवसाय में योगदान दे रही हैं।

उन्होंने बताया कि पोल्ट्री फार्म में पहले चरण में 1,500 चूजों के साथ उत्पादन शुरू किया गया। दूसरे चरण में भी चूजे लाकर कारोबार को आगे बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार, गांव में रोजगार के अवसर उपलब्ध होने से स्थानीय लोगों को अपने घर के आसपास ही आजीविका कमाने का मौका मिलता है। उन्होंने युवाओं से स्वरोजगार अपनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।

स्थानीय बाजार में बिक्री, विपणन में भी मिल रहा सहयोग

ग्रामोत्थान परियोजना के प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने बताया कि भराड़ी देवी स्वयं सहायता समूह पोल्ट्री फार्म का संचालन बेहतर तरीके से कर रहा है। समूह को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ उत्पादों की बिक्री और विपणन में भी सहयोग दिया जा रहा है। समूह द्वारा उत्पादित मुर्गियों की बिक्री आसपास के क्षेत्रों में की जा रही है।

परियोजना का उद्देश्य समूह को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराकर कारोबार को टिकाऊ बनाना और भविष्य में उसके विस्तार की संभावनाओं को मजबूत करना है।

महिलाओं की आय बढ़ाने और पलायन रोकने की पहल

भराड़ी देवी स्वयं सहायता समूह का प्रयास दिखाता है कि स्थानीय संसाधनों के उपयोग, सरकारी योजनाओं के सहयोग और सामूहिक भागीदारी से गांवों में रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। महिलाओं को गांव में ही काम मिलने से वे परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी निभा रही हैं।

इस तरह के स्वरोजगार ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत करने और रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

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