देहरादून : एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल से छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। यहां कक्षा 11 की छात्राओं ने अपने फिजिक्स शिक्षक पर अनुचित तरीके से छूने के आरोप लगाए हैं। मामले में करीब 15 छात्राओं के हस्ताक्षर वाला शिकायत पत्र स्कूल प्रबंधन को सौंपे जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता छात्रा और उसकी मां ने स्कूल प्रशासन पर मामले को दबाने, बेटी को डराने और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
मामले को लेकर स्कूल परिसर में हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है और स्कूल प्रबंधन सहित संबंधित पक्षों के बयान लिए जाएंगे। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कई महीनों से शिक्षक के व्यवहार को लेकर परेशानी का दावा
शिकायतकर्ता छात्रा का आरोप है कि संबंधित फिजिक्स शिक्षक लंबे समय से कक्षा की अन्य छात्राओं को भी गलत तरीके से छूते थे। छात्रा के मुताबिक, उसने पहले इस व्यवहार का विरोध किया और बाद में अपनी मां को इसकी जानकारी दी।
छात्रा की मां का कहना है कि उन्हें स्कूल में शिक्षक के कथित व्यवहार के बारे में पहले से कुछ जानकारी मिली थी। शुरुआत में उन्होंने बेटी को अपनी सुरक्षा के लिए मजबूती से आवाज उठाने की सलाह दी, लेकिन जब स्थिति गंभीर लगी तो उन्होंने स्कूल जाकर औपचारिक शिकायत करने का फैसला लिया।
परिवार के अनुसार, 15 अक्टूबर को छात्रा की मां स्कूल पहुंचीं और प्रिंसिपल के सामने शिक्षक के व्यवहार की शिकायत रखी। उनका दावा है कि इस शिकायत पर स्कूल प्रबंधन ने कार्रवाई करने और उनकी बेटी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया था।
15 छात्राओं के हस्ताक्षर वाला शिकायत पत्र
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू शिकायत पत्र है, जिस पर कथित तौर पर 15 छात्राओं ने हस्ताक्षर किए थे। छात्रा का कहना है कि उसने खुद आवेदन तैयार किया था, जिसमें शिक्षक के कथित व्यवहार का उल्लेख किया गया था।
परिवार के मुताबिक, शिकायत के बाद स्कूल प्रबंधन ने संबंधित शिक्षक को नौकरी से हटाने की बात कही थी। हालांकि, इसके बाद हुई घटनाओं को लेकर छात्रा और उसकी मां ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
छात्रा का कहना है कि वह अब अपने आवेदन की रिसीविंग लेना चाहती है, ताकि शिकायत जमा किए जाने का आधिकारिक प्रमाण उसके पास हो। परिवार ने यह भी मांग की है कि 15 छात्राओं के हस्ताक्षर वाले आवेदन की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए।
अगले दिन डायरेक्टर पर अभद्र सवाल पूछने का आरोप
छात्रा ने आरोप लगाया कि शिकायत करने के अगले दिन उसे स्कूल में बुलाया गया, जहां डायरेक्टर, प्रिंसिपल और एक महिला शिक्षिका मौजूद थीं। छात्रा के मुताबिक, वहां उससे शिक्षक के कथित व्यवहार को लेकर बेहद असहज करने वाले सवाल पूछे गए।
पीड़िता का आरोप है कि डायरेक्टर ने उससे पूछा कि क्या घर में उसके पिता उसे नहीं छूते। छात्रा का कहना है कि उसने जवाब दिया कि संबंधित शिक्षक उसके पिता नहीं हैं। इसके बाद कथित तौर पर उससे कहा गया कि शिक्षक ने उसे जिस तरह छुआ था, वह वैसा करके दिखाए।
छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान उसे झूठा बताया गया और कहा गया कि वह एक बुजुर्ग शिक्षक पर गलत आरोप लगा रही है। उसके मुताबिक, उसे यह एहसास कराने की कोशिश की गई कि इस मामले में कोई उसका साथ नहीं देगा।
छात्रा का दावा है कि उसे अपनी मां को इस बातचीत के बारे में नहीं बताने के लिए भी कहा गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिकायत वापस लेने पहुंची छात्रा, स्कूल के गेट पर रोके जाने का दावा
छात्रा के अनुसार, वह अपने हस्ताक्षरित शिकायत पत्र को वापस लेने और उसकी रिसीविंग प्राप्त करने के उद्देश्य से स्कूल पहुंची थी। उसने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने उसे बाहर ही रोके रखा और बाद में पुलिस को बुला लिया गया।
वहीं, छात्रा की मां ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनकी बेटी को स्कूल से बाहर जाने देने में बाधा डाली गई। परिवार का दावा है कि स्कूल के गेट पर ताला लगा दिया गया था। इन आरोपों को लेकर स्कूल परिसर में विवाद की स्थिति पैदा हो गई।
फिलहाल, गेट पर ताला लगाए जाने और परिवार को बाहर जाने से रोकने के आरोपों के संबंध में स्कूल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
बेटी के व्यवहार में बदलाव से चिंतित है मां
पीड़िता की मां का कहना है कि इस घटना के बाद से उनकी बेटी डरी-सहमी रहने लगी है और स्कूल जाने को लेकर भी घबराती है। परिवार का दावा है कि कक्षा की अन्य छात्राएं भी शिक्षक के कथित व्यवहार से परेशान थीं, लेकिन डर और सामाजिक दबाव के कारण वे खुलकर शिकायत नहीं कर पा रही थीं।
परिवार ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल में ऐसा माहौल होना चाहिए, जहां बच्चे किसी भी अनुचित व्यवहार के बारे में बिना डर के अपने अभिभावकों और शिक्षकों को बता सकें।
परिवार ने रखीं ये प्रमुख मांगें
छात्रा और उसकी मां ने स्कूल प्रबंधन से कई मांगें की हैं। इनमें शिकायत पत्र जमा किए जाने की आधिकारिक रिसीविंग देना, 15 छात्राओं के हस्ताक्षर वाले आवेदन की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराना और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करना शामिल है।
परिवार ने डायरेक्टर से स्कूल की असेंबली में विद्यार्थियों के सामने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की भी मांग की है। इसके अलावा, परिवार चाहता है कि स्कूल के सभी बच्चों को भरोसा दिलाया जाए कि अनुचित व्यवहार की शिकायत करने पर उन्हें डराया या प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।
पुलिस ने स्कूल पहुंचकर शुरू की जांच
मामले में हंगामे की सूचना मिलने के बाद कोतवाली डालनवाला पुलिस स्कूल पहुंची। कोतवाली प्रभारी विनोद गुसाईं के अनुसार, पुलिस को स्कूल में विवाद की सूचना मिली थी, जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने बताया कि फिलहाल स्कूल प्रबंधन और परिजनों से बातचीत की जा रही है। बातचीत के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
वहीं, देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने कहा कि मामला पुलिस के संज्ञान में आया है। स्कूल में पुलिस टीम भेजकर जांच कराई जा रही है और स्कूल प्रबंधन के बयान भी लिए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
छात्राओं की सुरक्षा और शिकायतों की निष्पक्ष जांच पर टिकी निगाहें
यह मामला स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। किसी भी छात्र या छात्रा की शिकायत को संवेदनशीलता से सुनना, उसकी पहचान और गरिमा की रक्षा करना तथा बिना दबाव के निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल, शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोपों, स्कूल प्रबंधन की कथित भूमिका और परिवार को स्कूल परिसर से बाहर जाने से रोकने के दावों की जांच की जानी है। पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
