- 139वीं जयंती पर याद किए गए भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत, विभिन्न क्षेत्रों की सात प्रतिभाओं को ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान
देहरादून। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कुशल राजनेता, भारत के पूर्व गृह मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती देहरादून के आईआरडीटी सभागार में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। पंडित गोविंद बल्लभ पंत जयंती समारोह समिति एवं हिमालयन अभ्युदय सामाजिक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में पंत के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली सात प्रतिभाओं को ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान से सम्मानित किया गया।
पंत की दूरदृष्टि ने विकास की नींव मजबूत की : ऋतु खंडूड़ी
मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत को कुशल राजनेता, अधिवक्ता और दूरदृष्टा बताते हुए कहा कि वे भारतीय राजनीति में मानदंड स्थापित करने वाले युगपुरुष थे। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष किया और सफलता हासिल की। कुली बेगार प्रथा के खिलाफ उनके आंदोलन ने अंग्रेजी शासन को चुनौती दी तथा इस कुप्रथा के अंत का मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने कहा कि तराई-भाबर के विकास को लेकर भी पंडित पंत की दूरदृष्टि स्पष्ट थी। आज क्षेत्र में दिखाई दे रहा विकास उनकी दूरगामी सोच का परिणाम है। खंडूड़ी ने युवाओं से पंडित पंत के संघर्ष, विचारों और दूरदृष्टि से प्रेरणा लेकर राष्ट्र एवं समाज के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
पंत की जीवन यात्रा संघर्ष और सेवा की मिसाल
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नीरज पांडे ने पंडित पंत की जीवन यात्रा और उनके संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा के खूंट गांव से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक की उनकी यात्रा और फिर उत्तराखंड की सेवा के लिए काशीपुर लौटना उनके जीवन के उद्देश्य को दर्शाता है। काशीपुर में प्रेम सभा के गठन के माध्यम से उन्होंने शोषित, वंचित और पीड़ित लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। संयुक्त प्रांत के प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्य ऐतिहासिक महत्व रखते हैं।
देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत को आधुनिक भारत के निर्माताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि पंत राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रबल समर्थक थे और देश के प्रशासनिक पुनर्गठन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पहाड़ के प्रति उनके विशेष लगाव के कारण उन्हें ‘हिमालय पुत्र’ कहा जाता है। उन्होंने युवाओं से पंडित पंत के जीवन और विचारों का अध्ययन कर उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
सात प्रतिभाओं को मिला ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली सात प्रतिभाओं को ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान से सम्मानित किया गया। महिला सशक्तिकरण एवं उद्यमिता के क्षेत्र में शशि बहुगुणा रतूड़ी, साहित्य लेखन में शीशपाल गुंसाई, शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. ममता सिंह, पत्रकारिता एवं जनसरोकारों के लिए वरिष्ठ पत्रकार अवधेश नौटियाल, पर्यावरण संरक्षण के लिए दरपान सिंह बोरा, स्वरोजगार के क्षेत्र में गोपाल भट्ट और लोकगायन के लिए विवेक नौटियाल को सम्मानित किया गया।
दिल्ली की नौकरी छोड़ मातृभूमि लौटे गोपाल भट्ट, टिहरी में खड़ा किया रोजगार का मॉडल
स्वरोजगार के क्षेत्र में सम्मानित गोपाल भट्ट, ग्राम ढ़रसाल गांव, बादशाहीथौल, टिहरी गढ़वाल के निवासी हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम तथा पुणे से एमबीए की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने करीब 15 वर्षों तक दिल्ली में मार्केटिंग क्षेत्र में कार्य किया। महानगर में लंबे समय तक नौकरी करने के बाद उन्होंने अपनी मातृभूमि टिहरी गढ़वाल लौटने का निर्णय लिया और रिवर्स माइग्रेशन को अपनाते हुए स्वयं का व्यवसाय स्थापित किया।
गोपाल भट्ट पिछले आठ वर्षों से टिहरी गढ़वाल में होटल का संचालन कर रहे हैं। उनके इस प्रयास की खास बात यह है कि उन्होंने पहाड़ लौटकर केवल अपना रोजगार ही नहीं बनाया, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित किए। उनका यह प्रयास पहाड़ों से पलायन की चुनौती के बीच रिवर्स माइग्रेशन और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की संभावनाओं की मिसाल के रूप में सामने आया है। ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान के माध्यम से उनके इसी योगदान को पहचान मिली है।
पुस्तक ‘युवा उत्तराखंड’ के कवर का लोकार्पण
समारोह में डॉ. नवीन पंत की आने वाली पुस्तक ‘युवा उत्तराखंड : शिक्षा, कौशल एवं आत्मनिर्भरता’ के कवर पृष्ठ का भी लोकार्पण किया गया। समारोह में सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, महिला आईटीआई, उत्तरांचल विश्वविद्यालय और तुलाज विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने योग, लोकनृत्य, लोकगायन और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उत्साह भर दिया। अतिथियों ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को सम्मानित किया।
युवा पीढ़ी को पंत के विचारों से जोड़ने का प्रयास
कार्यक्रम संयोजक राकेश डोभाल ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत जयंती समारोह समिति और हिमालयन अभ्युदय सामाजिक संस्थान हर वर्ष पंत की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित कर युवा पीढ़ी को उनके जीवन, संघर्ष और विचारों से परिचित कराने का प्रयास कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन पंत ने किया, जबकि सह-संयोजक प्रदीप कुमार ने अतिथियों का आभार जताया।
समारोह में 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री ज्योति प्रसाद गैरोला, डॉ. भावना डोभाल, जीएमवीएन के निदेशक विशाल गुप्ता, साक्षी शंकर, सुधाकर भट्ट, नीतू कुमारी, प्रभात कुमार, अवधेश तिवारी, बृजपाल सिंह, शमशेर सिंह, दीपा धामी, अनिल रस्तोगी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

