बदरीनाथ : उत्तराखण्ड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा अब अपने समापन की ओर बढ़ रही है। विजयादशमी के अवसर पर बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने की तिथि घोषित कर दी गई है। परंपरा के मुताबिक, बदरीनाथ मंदिर के कपाट 16 नवंबर 2026 को रात 9 बजकर 37 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद होंगे। इसके बाद 17 नवंबर को भगवान की देवडोलियां निर्धारित शीतकालीन प्रवास स्थलों के लिए रवाना होंगी।

वहीं, भगवान केदारनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को 11 नवंबर तक का अवसर मिलेगा। भैया दूज के पावन पर्व पर केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। दूसरी ओर, मां यमुना के धाम यमुनोत्री के कपाट भी 11 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 28 मिनट पर बंद होंगे। इन तिथियों के साथ ही तीनों धामों में इस वर्ष की यात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है।

 

चारधाम यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

इस वर्ष उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चारों धामों में अब तक 60 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इनमें बदरीनाथ धाम करीब 21 लाख श्रद्धालुओं के आगमन के साथ सबसे आगे है। केदारनाथ धाम में लगभग 18 लाख भक्त दर्शन कर चुके हैं। वहीं, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, करीब चार लाख श्रद्धालु हेमकुंड साहिब में मत्था टेक चुके हैं।

 

विजयादशमी पर निभाई गई सदियों पुरानी परंपरा

बदरीनाथ धाम में कपाट बंद होने की तिथि घोषित करने की परंपरा हर वर्ष विजयादशमी के दिन निभाई जाती है। इस अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक आयोजनों के बीच उत्सवी माहौल देखने को मिलता है। बामणी गांव के ग्रामीण पारंपरिक परिधानों में सजकर समारोह में शामिल होते हैं।

इस दौरान अगले यात्रा सत्र की व्यवस्थाओं से जुड़े लोगों को पगड़ी पहनाने की रस्म भी निभाई जाती है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करता है।

कपाट बंद होने के बाद शीतकाल के दौरान नियमित दर्शन की व्यवस्था निर्धारित शीतकालीन पूजा स्थलों पर जारी रहेगी। अब श्रद्धालु अगले यात्रा सत्र का इंतजार करेंगे, जबकि इस वर्ष चारधाम पहुंचे लाखों भक्तों के लिए यात्रा की यादें आस्था और भक्ति से जुड़ी रहेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *