हरिद्वार की नगर निगम भूमि घोटाले की जांच में विजिलेंस टीम द्वारा कार्रवाई को तेज करते हुए उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत विजिलेंस (सतर्कता अधिष्ठान) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। हरिद्वार में हुए बहुचर्चित 56 करोड़ रुपये के भूमि खरीद घोटाले की परतें खोलने के लिए विजिलेंस की विशेष टीम ने जिले में डेरा डाल दिया है। टीम का मुख्य उद्देश्य घोटाले से जुड़े पुख्ता साक्ष्य जुटाना और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को आपस में जोड़ना है।
​इस महाघोटाले में कई रसूखदार नौकरशाहों और सफेदपोशों के शामिल होने की बात सामने आई है, जिसने शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया है।
​बैंक खातों और लॉकरों की खंगाली जा रही कुंडली
​विजिलेंस के रडार पर इस समय कई तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी, भू-माफिया और बिचौलिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस की टीम ने हरिद्वार के कई बैंकों में दस्तक देकर संदिग्ध अधिकारियों और उनके करीबियों के बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और लॉकरों के विवरण कब्जे में ले लिए हैं।
​जांच एजेंसी मुख्य रूप से यह पता लगाने में जुटी है कि भूमि खरीद के नाम पर जो सरकारी धनराशि जारी की गई थी, वह किन-किन खातों से होते हुए कहाँ ट्रांसफर की गई। वित्तीय लेनदेन (मनी ट्रेल) को साबित करने के लिए बैंकिंग दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।
​​इस 56 करोड़ के भूमि घोटाले की आंच उत्तराखंड कैडर के कई वरिष्ठ और तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। जांच के दायरे में आए प्रमुख आईएएस अधिकारियों के नामों को लेकर प्रशासनिक गलियारों में भारी सुगबुगाहट है इसके अलावा कई तत्कालीन पीसीएस (PCS) अधिकारी, तहसीलदार, पटवारी और राष्ट्रीय राजमार्ग/संबंधित प्राधिकरण के अधिकारी भी विजिलेंस की रडार पर हैं।

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