• नंदा डोलियों और सैकड़ों छंतोलियों के पहुंचते ही गूंज उठे लोकगीत-जागर

गोपेश्वर (चमोली)। मां नंदा की बड़ी जात यात्रा जैसे-जैसे अपने अगले पड़ावों की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे पहाड़ की आस्था, परंपरा और भावनाओं का रंग भी गहराता जा रहा है। बुधवार को बड़ी जात जब वाण गांव पहुंची तो यहां का माहौल भावुक हो उठा। धर्मभाई लाटू देवता और मां नंदा के मिलन का दृश्य देखकर श्रद्धालुओं की आंखें छलछला उठीं। वर्षों पुरानी इस परंपरा के साक्षी बने भक्त कुछ पल के लिए भाव-विभोर होकर मां नंदा और लाटू देवता के दर्शन करते रहे।

कनोल गांव से चली बड़ी जात के वाण पहुंचते ही पूरा गांव लोकगीतों और जागरों से गूंज उठा। ग्रामीणों ने अपनी ध्याणी मां नंदा का पारंपरिक ढंग से स्वागत किया। मां नंदा की डोली के साथ चल रहे श्रद्धालुओं और देव डोलियों के वाण पहुंचने पर गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया।

बड़ी जात में कुरूड़-दशोली की नंदा डोली, बंड की नंदा डोली, ल्वाणी की ज्वाल्पा देवी की डोली, बंड भूमियाल की छंतोली, गेदाणु देवता की छंतोली सहित सैकड़ों छंतोलियां शामिल हैं। इनके साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी वाण पहुंचे। देव डोलियों और छंतोलियों के गांव में प्रवेश करते ही पूरा क्षेत्र आस्था के रंग में रंग गया।

लाटू मंदिर में रात बिताएंगी छंतोलियां

वाण पहुंचने के बाद बड़ी जात में शामिल कई छंतोलियों ने लाटू देवता मंदिर में रात्रि विश्राम के लिए डेरा डाल लिया। मंदिर परिसर में देव डोलियों के पहुंचने से माहौल और भी आध्यात्मिक हो गया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के साथ मां नंदा और लाटू देवता से सुख-समृद्धि की कामना की।

वेदनी बुग्याल की ओर बढ़े श्रद्धालु

बड़ी जात के साथ चल रहे श्रद्धालुओं में कई जत्थे आगे बढ़कर गैरोली और वेदनी बुग्याल तक पहुंच चुके हैं। ऊंचाई वाले पड़ावों की ओर बढ़ती यात्रा में मौसम और दुर्गम रास्तों की चुनौतियों के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह बना हुआ है।

वाण में मां नंदा और लाटू देवता का मिलन बड़ी जात यात्रा का ऐसा पड़ाव रहा, जहां देव परंपरा के साथ भाई-बहन के रिश्ते की भावनात्मक छटा भी देखने को मिली। मां नंदा की डोली के सामने लाटू देवता की उपस्थिति और दोनों के मिलन के दृश्य ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। लोकगीतों, जागरों और जयकारों के बीच देर तक वाण का माहौल भक्तिमय बना रहा।

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