देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद उत्तराखंड ने यह उपलब्धि हासिल की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ण साक्षरता मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। अब डिजिटल और वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य जागरूकता और जीवन कौशल को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना सरकार का अगला लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में धामी ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले नव-साक्षरों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ क्षेत्रों वाले उत्तराखंड में यह उपलब्धि शिक्षकों, विद्यार्थियों, नव-साक्षरों, स्वयंसेवकों और अभियान से जुड़े लोगों की सामूहिक मेहनत का परिणाम है।

धामी ने कहा कि साक्षरता अब केवल पढ़ने-लिखने या हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं है। नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की समझ के साथ डिजिटल तकनीक और वित्तीय सेवाओं का इस्तेमाल करना भी आना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी लगातार काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि राज्य के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है। 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं। बालाश्रय योजना के तहत अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा और हाईस्कूल व इंटर स्तर के 100-100 विद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित करने का काम किया जा रहा है।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि साक्षरता अभियान में करीब 25 हजार स्वयंसेवकों ने योगदान दिया। अगले छह माह में राज्य को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि जिस गांव में एक भी बच्चा पढ़ने वाला होगा, वहां विद्यालय बंद नहीं किया जाएगा।

इस अवसर पर विधायक  सविता कपूर, अपर सचिव भारत सरकार अर्चना शर्मा अवस्थी, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव  नमामि बंसल एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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