काठमांडू, 30 अगस्त। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और मलबे के सैलाब ने भारी तबाही मचा दी है। रसुवा जिले के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने के बाद अचानक आई बाढ़ ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। इस प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी पड़ा है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में आपदा से मरने वालों की संख्या करीब 750 तक पहुंच गई है, जबकि 3,000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में अकेले 734 लोगों की मौत की सूचना है और करीब 2,500 लोग लापता हैं। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है, हालांकि खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़क-पुल और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण बचाव दलों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ के तेज बहाव ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी के आसपास बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क टूट गया है और पुल बह जाने से प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाना चुनौती बन गया है। जलविद्युत परियोजनाओं और सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है। खराब मौसम के बावजूद हेलीकॉप्टरों और सुरक्षा बलों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। चीन की ओर से भी बचाव दल और राहत सामग्री भेजी गई है।
इस बीच, भारत के नागरिक भी इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। पीड़ितों की पहचान और शवों की शिनाख्त के लिए भारतीय फॉरेंसिक टीम भी नेपाल पहुंची है।
आपदा के बाद नेपाल के कई हिस्सों में फिर से बाढ़ का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने नदी किनारे और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। राहत एजेंसियों के सामने अब प्रभावित परिवारों तक भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने की बड़ी चुनौती है।
नेपाल में आई यह त्रासदी हिमालयी क्षेत्र में बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे की ओर भी गंभीर संकेत कर रही है। फिलहाल पूरा ध्यान राहत, बचाव और लापता लोगों की तलाश पर केंद्रित है।
