सितारगंज। ऊधमसिंह नगर जिले की सितारगंज तहसील में गुरुवार को विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई के दौरान दो कर्मचारियों को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के बाद तहसील कर्मचारियों के विरोध के चलते विजिलेंस की 10 सदस्यीय टीम कई घंटों तक तहसील परिसर में ही घिरी रही। देर रात तक चले घटनाक्रम के बाद भी सुबह तक टीम को बाहर निकालने के लिए पुलिस प्रशासन को मशक्कत करनी पड़ी।

जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता अवतार सिंह ने विजिलेंस से शिकायत की थी कि जमीन कुर्की की कार्रवाई रुकवाने और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण की आरसी समाप्त कराने के एवज में संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा और वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है। आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने पहले 16 हजार रुपये की मांग की, जिसे बाद में 14 हजार रुपये पर तय किया गया।

शिकायत के सत्यापन के बाद विजिलेंस ने ट्रैप की कार्रवाई करते हुए दोनों कर्मचारियों को कथित रूप से 14 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

कार्रवाई के बाद तहसील कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। लेखपाल एवं संग्रह अमीन संघ के नेतृत्व में कर्मचारियों ने मुख्य गेट बंद कर विजिलेंस टीम को परिसर से बाहर नहीं निकलने दिया। स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

वहीं, तहसीलदार हिमांशु जोशी सहित कुछ कर्मचारियों ने विजिलेंस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि बरामद धनराशि रिश्वत नहीं, बल्कि राजकीय राजस्व एवं केसीसी ऋण की वैध वसूली की राशि थी। उनका आरोप है कि कर्मचारियों के साथ अनुचित कार्रवाई की गई है।

दूसरी ओर, विजिलेंस टीम के प्रभारी प्रभात कुमार ने कहा कि पूरी कार्रवाई साक्ष्यों और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप की गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पक्ष को कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह न्यायालय में अपनी बात रख सकता है।

घटना के बाद राजस्व विभाग और विजिलेंस के बीच विवाद की स्थिति बन गई है। मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में है और पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर नजर रखी जा रही है।

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