चमोली/देहरादून : उत्तराखण्ड की बेटियां लगातार देश और दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। इसी कड़ी में चमोली जिले के पोखरी विकासखंड के किमोठा गांव की बेटी मुन्नी देवी ने थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक जीतकर पूरे उत्तराखण्ड और देश का नाम रोशन किया है।

70 किलोग्राम वर्ग में दोहरी सफलता

33 वर्षीय मुन्नी देवी ने 70 किलोग्राम वर्ग में पुल पावरलिफ्टिंग और बेंच प्रेस स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पाकिस्तान, थाईलैंड समेत 18 देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, लेकिन मुन्नी देवी ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से सभी को पीछे छोड़ते हुए भारत का तिरंगा बुलंद किया।

संघर्ष और मेहनत की मिसाल

मुन्नी देवी की सफलता रातोंरात नहीं मिली। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत और समर्पण के दम पर यह मुकाम हासिल किया। इससे पहले भी वह राष्ट्रीय स्तर पर तीन बार स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं और लगातार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तराखण्ड का गौरव बढ़ा रही हैं।

पहाड़ की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

मुन्नी देवी की उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखण्ड की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते।

जनपद में खुशी की लहर

मुन्नी देवी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर चमोली जिले सहित पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सफलता से उत्तराखंड की खेल प्रतिभाओं को नई पहचान मिली है और आने वाली पीढ़ी को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

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