विशेष संवाददाता
नई दिल्ली/देहरादून: देश भर में बिना डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के सीधे मेडिकल स्टोर की खिड़की से एंटीबायोटिक दवाएं बेचे जाने के खिलाफ केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालयों ने संयुक्त रूप से कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सामान्य सर्दी, खांसी, हल्के फ्लू या वायरल बुखार के लक्षणों पर केमिस्ट द्वारा धड़ल्ले से एजित्थ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन, एमोक्सिसिलिन या ओफ्लोक्सासिन जैसी शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाएं थमाए जाने की प्रवृत्ति पर अब कानूनी हथौड़ा चलने वाला है।
ड्रग कंट्रोल प्रशासन के ताजा निर्देशों के मुताबिक, बिना पर्चे ऐसी दवाएं बेचने वाले केमिस्ट्स पर केवल चालान या चेतावनी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए जाएंगे और जिम्मेदार संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर न्यायिक कार्रवाई की जाएगी।
कानून की किताब: क्या हैं नियम और अनिवार्य शर्तें?
भारत में दवाओं का निर्माण, आयात, वितरण और खुदरा बिक्री ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ और ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945’ के तहत नियंत्रित होते हैं। इन नियमों के तहत एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तय हैं:
* शेड्यूल H और H1 का सख्त वर्गीकरण: अधिकांश एंटीबायोटिक दवाएं कानून के शेड्यूल H और शेड्यूल H1 के दायरे में आती हैं। नियम 65 और 97 के अनुसार, इन श्रेणियों की कोई भी दवा किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर (MBBS/MD डॉक्टर) के हस्ताक्षरित पर्चे के बिना नहीं दी जा सकती।
* शेड्यूल H1 रजिस्टर का संधारण: शेड्यूल H1 में शामिल 24 प्रमुख दवाओं (जिनमें तीसरी और चौथी पीढ़ी की एंटीबायोटिक्स और कुछ आदत बनाने वाली दवाएं शामिल हैं) की बिक्री का एक अलग लेजर/रजिस्टर बनाना अनिवार्य है।
* इस रजिस्टर में मरीज का पूरा नाम और पता,
* दवा लिखने वाले डॉक्टर का नाम, क्लिनिक का पता और स्टेट मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन नंबर,
* दवा का नाम, बैच नंबर और दी गई कुल मात्रा,
* बिक्री की तारीख दर्ज होना जरूरी है।
* 3 साल तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना: इस रजिस्टर और संबंधित पर्चों की प्रतियों को मेडिकल स्टोर को कम से कम तीन वर्षों तक सुरक्षित रखना होता है ताकि ड्रग इंस्पेक्टर के औचक निरीक्षण के समय इसे प्रस्तुत किया जा सके।
* ‘रेड लाइन’ पैकेजिंग का अनुपालन: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशानुसार, सभी शेड्यूल H और H1 दवाओं के स्ट्रिप (पत्ते) पर एक लाल रंग की खड़ी लकीर (Red Line) तथा चेतावनी का बॉक्स अनिवार्य रूप से अंकित होता है, जो यह स्पष्ट करता है कि इसे बिना पर्चे के बेचना कानूनन जुर्म है।
नियम तोड़ने पर क्या कानूनी कार्रवाई और सजा होगी?
यदि कोई मेडिकल स्टोर संचालक या फार्मासिस्ट बिना वैध पर्चे के एंटीबायोटिक दवाएं बेचते हुए पाया जाता है, तो कानून के तहत निम्नलिखित दंडात्मक प्रक्रिया अपनाई जाती है:
* लाइसेंस का निलंबन एवं रद्दीकरण: ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स के नियम 66 के तहत औषधि नियंत्रण विभाग संबंधित प्रतिष्ठान का फॉर्म 20/21 (रिटेल ड्रग लाइसेंस) फौरी तौर पर निलंबित कर सकता है। जांच में बार-बार उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है।
* दुकान की सीलिंग और स्टॉक की जब्ती: ड्रग इंस्पेक्टर को अधिकार है कि वह अवैध बिक्री की आशंका में दुकान को सील करे और पूरी दवा खेप को जब्त कर अदालत में बतौर साक्ष्य पेश करे।
* कारावास और आर्थिक दंड: औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 27(d) और धारा 18 के उल्लंघन के तहत आरोपी संचालक या फार्मासिस्ट के खिलाफ सक्षम न्यायालय में परिवाद दर्ज होता है। इसमें 1 वर्ष से 2 वर्ष तक के सश्रम कारावास और अर्थदंड (जुर्माना) का स्पष्ट प्रावधान है।
* फार्मासिस्ट का लाइसेंस निरस्त: यदि दुकान पर मौजूद रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट इस गैरकानूनी कृत्य में शामिल पाया जाता है, तो स्टेट फार्मेसी काउंसिल फार्मेसी एक्ट, 1948 की धारा 36 के तहत उसका पंजीकरण निलंबित या निरस्त कर सकती है, जिससे वह भविष्य में कहीं भी प्रैक्टिस नहीं कर पाएगा।
आम जनता कहां और कैसे दर्ज कराए शिकायत?
यदि आपके आसपास कोई मेडिकल स्टोर बिना डॉक्टर के पर्चे के एंटीबायोटिक या अनुसूची वाली दवाएं बेच रहा है, तो एक सजग नागरिक के रूप में निम्नलिखित माध्यमों पर सीधी शिकायत दर्ज की जा सकती है:
* जिला ड्रग इंस्पेक्टर / सीएमओ कार्यालय: प्रत्येक जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) परिसर में स्थित ड्रग कंट्रोलर या ड्रग इंस्पेक्टर के कार्यालय में लिखित शिकायत दी जा सकती है। शिकायत के साथ दवा का बिल (यदि मिला हो) या स्टोर का नाम-पता संलग्न करें।
* राज्य FDA का ग्रीवेंस पोर्टल: राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drugs Administration – FDA) की आधिकारिक राज्य स्तरीय वेबसाइट पर जाकर ‘शिकायत निवारण’ (Grievance Cell) में ऑनलाइन कंप्लेंट रजिस्टर की जा सकती है।
* राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline): भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल करके या ‘NCH App’ के जरिए मेडिकल स्टोर के खिलाफ अनुचित व्यापार आचरण (Unfair Trade Practice) की शिकायत दर्ज कराएं।
* केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO): गंभीर या बड़े पैमाने पर हो रहे सिंडिकेट की शिकायत cdsco.gov.in पोर्टल पर मौजूद सतर्कता प्रकोष्ठ को सीधे ईमेल या पोस्ट के जरिए भेजी जा सकती है।
जनस्वास्थ्य पर संकट: ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ (AMR) की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बिना आवश्यकता के एंटीबायोटिक्स का अनियंत्रित इस्तेमाल मानव जाति के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है।
जब कोई व्यक्ति बिना जांच और बिना सही डोज (Dose) के एंटीबायोटिक खाता है, तो शरीर के बैक्टीरिया उस दवा के आदी हो जाते हैं और खुद को उसके अनुकूल ढाल लेते हैं। इसे ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ (AMR) कहा जाता है। इसके चलते भविष्य में जब उस व्यक्ति को कोई गंभीर जीवाणु संक्रमण होता है, तो सामान्य एंटीबायोटिक्स पूरी तरह बेअसर हो जाती हैं। स्थिति बिगड़ने पर साधारण निमोनिया, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) या मामूली घाव भी जानलेवा रूप ले लेते हैं। मेडिकल जगत इसे ‘सुपरबग्स’ का युग कहता है, जहां आधुनिक चिकित्सा के हथियार कुंद पड़ रहे हैं।
यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियां आम नागरिकों से अपील कर रही हैं कि वे सर्दी, जुकाम जैसी वायरल बीमारियों में मेडिकल स्टोर से खुद एंटीबायोटिक मांगने की जिद न करें और केमिस्ट्स को भी सख्त ताकीद की जा रही है कि वे व्यावसायिक मुनाफे के लिए जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बंद करें।

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