नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026 — देश के प्रशासनिक हलकों से एक बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है।
प्रहलाद जोशी अब उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार भी संभालेंगे।
मुख्य बिंदु
नई जिम्मेदारी: धारवाड़ (कर्नाटक) से 5 बार के सांसद प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी गई है।
इस्तीफे का कारण: धर्मेंद्र प्रधान ने प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया।
राष्ट्रपति भवन की अधिसूचना: राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रहलाद जोशी तत्काल प्रभाव से यह जिम्मेदारी संभालेंगे।
प्रहलाद जोशी का पहला बयान
नया प्रभार मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा:
”मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य भावना और नम्रता के साथ स्वीकार करता हूँ। आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में कई ऐतिहासिक काम हुए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मैं पूरी निष्ठा के साथ काम करूँगा।”
प्रहलाद जोशी का राजनीतिक सफर
संसदीय अनुभव: प्रहलाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ सीट से लगातार जीतते आ रहे हैं और पार्टी के वरिष्ठ सांगठनिक नेताओं में शामिल हैं।
पूर्व मंत्रालय: इससे पहले वे संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सफलतापूर्वक संभाल चुके हैं।
मौजूदा विभाग: वे वर्तमान में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे हैं।
नए शिक्षा मंत्री के समक्ष मुख्य चुनौतियाँ
परीक्षा प्रणाली में सुधार: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना और प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन को विवादमुक्त बनाना।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का विस्तार: NEP 2020 के नए चरणों को राज्यों के साथ समन्वय बनाकर लागू करना।
छात्रों में विश्वास की बहाली: हालिया विवादों के बाद देशभर के छात्रों और अभिभावकों का भरोसा जीतना।
