हरिद्वार।सनातन धर्म में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण मानी जाने वाली निर्जला एकादशी का पर्व आज देश-दुनिया सहित तीर्थ नगरी हरिद्वार में पूरी श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार के ‘हर की पैड़ी’ समेत विभिन्न गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। कड़कड़ाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद भक्तों की आस्था भारी नजर आई और लाखों श्रद्धालुओं ने पतित पाविनी मां गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
सभी एकादशियों का राजा है ‘निर्जला एकादशी’: जानिए इसका महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वर्ष भर में आने वाली सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी (जिसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है) सबसे श्रेष्ठ और फलदायी मानी गई है।
कठिन साधना: इस व्रत में अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग करना होता है। द्वादशी तिथि के सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।
महाभारत कालीन कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भीमसेन ने वेदव्यास जी से कहा कि वे भूख सहन नहीं कर सकते और हर एकादशी पर व्रत रखना उनके लिए असंभव है, तब व्यास जी ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का यह कठिन व्रत रखने की सलाह दी थी।
संपूर्ण फल की प्राप्ति: माना जाता है कि मात्र इस एक एकादशी का पूरी निष्ठा से व्रत रखने पर साल भर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य फल प्राप्त होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भीषण गर्मी में दान-पुण्य का विशेष महत्व, मिलते हैं ये अचूक लाभ
निर्जला एकादशी पर व्रत के साथ-साथ दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन किए गए दान का फल कभी समाप्त नहीं होता (अक्षय होता है)।
जल और अन्न दान का महत्व: चूंकि यह व्रत भीषण गर्मी के महीने में आता है, इसलिए इस दिन प्यासे को पानी पिलाना, राहगीरों के लिए छबील लगाना, मीठा जल पिलाना महापुण्य दायक माना गया है।
इन वस्तुओं का करें दान: आज के दिन मिट्टी का घड़ा (कलश), खरबूजा, आम, पंखा, छाता, वस्त्र और सत्तू का दान करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
लाभ: शास्त्रों के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक दान करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है, घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और अनजाने में हुए सभी पापों का नाश होता है।
हरिद्वार में गंगा स्नान का विशेष महात्म्य: खुलते हैं बैकुंठ के द्वार
वैसे तो इस दिन कहीं भी पवित्र नदी में स्नान करना फलदायी है, लेकिन तीर्थ नगरी हरिद्वार में गंगा स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
”गंगा द्वारे कुशावर्ते बिल्वके नीलपर्वते।
स्नात्वा कनखले देवि भूयोजन्म न विद्यते॥”
अक्षय पुण्य की प्राप्ति: हरिद्वार को ‘हरि का द्वार’ (मोक्ष का द्वार) कहा जाता है। मान्यता है कि निर्जला एकादशी के दिन हरिद्वार में गंगा स्नान करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं।
अश्वमेध यज्ञ जैसा फल: आज के दिन हरिद्वार की पावन हर की पैड़ी पर ब्रह्मकुंड में स्नान और गंगा जी की आरती के दर्शन करने से सौ अश्वमेध यज्ञ और व्यतिपात योग के समान फल प्राप्त होता है।
मानसिक शांति और मोक्ष: आज सुबह से ही श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद घाटों पर बैठे पुरोहितों को अन्न, जल से भरे पात्र और दक्षिणा देकर अपने पितरों की आत्मा की शांति और परिवार के कल्याण की कामना की।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए हरिद्वार प्रशासन द्वारा सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे। हर की पैड़ी और आसपास के घाटों पर सुरक्षा बल और जल पुलिस मुस्तैद दिखी, ताकि श्रद्धालु सुगमता से स्नान कर सकें।
